बेंगलुरु/नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने संघ के रजिस्ट्रेशन को लेकर उठे सवालों पर स्पष्ट प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि RSS कोई गुप्त संगठन नहीं है और उसका काम पूरी तरह सार्वजनिक है। उन्होंने कहा कि पिछले 100 वर्षों में किसी भी सरकारी अधिकारी या संस्था ने संघ से रजिस्ट्रेशन कराने की अनिवार्यता नहीं बताई।
केरल के त्रिशूर में आयोजित RSS के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा कि संगठन के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है। संघ खुले मैदानों में शाखाएं लगाता है, लोगों को आमंत्रित करता है और अपने कार्यों की जानकारी सार्वजनिक रूप से देता है।
‘सरकार जानती है कि RSS का अस्तित्व है’
मोहन भागवत ने कहा कि आमतौर पर वे संस्थाएं रजिस्ट्रेशन कराती हैं जिन्हें सरकारी फंडिंग या वित्तीय सहायता की आवश्यकता होती है। RSS को ऐसी किसी सहायता की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा, “सरकार पूरी तरह जानती है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का अस्तित्व है। हमारा काम सार्वजनिक है और देशभर में लाखों लोग इसे प्रत्यक्ष रूप से देखते हैं।”
प्रतिबंधों का जिक्र करते हुए बोले- सरकार को हमेशा संघ की जानकारी रही
भागवत ने कहा कि RSS पर इतिहास में दो बार प्रतिबंध लगाए गए थे। एक प्रतिबंध न्यायालय के आदेश के तहत लगाया गया था, जबकि दूसरा बाद में सत्याग्रह के पश्चात हटाया गया।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार को संगठन के अस्तित्व की जानकारी नहीं होती तो ऐसे कदम संभव नहीं होते। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 1950 में संघ ने अपना लिखित संविधान सरकार को सौंप दिया था और उस समय भी किसी ने रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता नहीं बताई।
‘100 साल में किसी ने रजिस्ट्रेशन कराने को नहीं कहा’
RSS प्रमुख ने कहा कि संघ को स्थापित हुए एक सदी से अधिक समय हो चुका है, लेकिन किसी सरकारी संस्था ने कभी यह नहीं कहा कि संगठन का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कई सामाजिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाएं ऐसी हैं जो औपचारिक रूप से रजिस्टर्ड नहीं हैं, फिर भी समाज में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। ‘संघ को बदनाम करने की कोशिशें सफल नहीं होंगी’। मोहन भागवत ने आरोप लगाया कि कुछ लोग संघ के कार्यों में बाधा डालने और जनता के मन में संदेह पैदा करने का प्रयास करते हैं। हालांकि अब ऐसा करना आसान नहीं है क्योंकि देश के लोग संघ को करीब से जानते और समझते हैं।
उन्होंने कहा कि RSS के स्वयंसेवक देश के लगभग हर क्षेत्र में सक्रिय हैं और समाज के बीच रहकर सेवा कार्य करते हैं। ऐसे में संगठन के बारे में किसी प्रकार की गोपनीयता का सवाल ही नहीं उठता।
प्रियांक खड़गे ने उठाए थे पारदर्शिता और फंडिंग से जुड़े सवाल
दरअसल, कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने RSS के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर मोहन भागवत को पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, रजिस्ट्रेशन, फंडिंग और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठाए थे।
अपने पत्र में उन्होंने कहा था कि जब नागरिकों, ट्रस्टों, मंदिरों, कंपनियों और अन्य संगठनों को कानून के तहत रजिस्ट्रेशन और वित्तीय विवरण सार्वजनिक करना पड़ता है, तो RSS को इससे छूट क्यों मिलनी चाहिए। खड़गे ने संघ से अपनी कानूनी स्थिति स्पष्ट करने, आय-व्यय का ब्योरा सार्वजनिक करने और संगठन के वित्तीय स्रोतों की जानकारी साझा करने की मांग की थी।
RSS शताब्दी वर्ष के बीच तेज हुई राजनीतिक बहस
RSS के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संगठन की भूमिका, संरचना और पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर विपक्षी दल संघ से जवाबदेही और वित्तीय पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, वहीं RSS नेतृत्व का कहना है कि संगठन का कार्य पूरी तरह सार्वजनिक है और उसका अस्तित्व तथा गतिविधियां किसी से छिपी नहीं हैं।


