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    भोजशाला विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने नमाज के लिए भोजशाला से सटी जमीन तय की

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    नई दिल्ली/धार। मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार की नमाज के लिए भोजशाला से सटी एक वैकल्पिक जमीन निर्धारित कर दी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि धार्मिक अधिकारों का संरक्षण संविधान की मूल भावना है और केवल कानून-व्यवस्था की आशंका के आधार पर किसी समुदाय के धार्मिक अधिकारों को सीमित नहीं किया जा सकता।

    चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान नक्शे में चिन्हित ‘यलो साइट’ को नमाज के लिए उपयुक्त माना। अदालत ने कहा कि इस स्थान तक पहुंचने के लिए अलग रास्ता उपलब्ध है और यह विवादित भोजशाला परिसर के निकट स्थित है। कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

    पहले तय की गई जगह पर मुस्लिम पक्ष ने जताई थी आपत्ति

    इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम निर्देश के बाद जिला प्रशासन ने भोजशाला से करीब दो किलोमीटर दूर एक स्थान चिन्हित किया था। मुस्लिम पक्ष ने इसे अदालत के आदेश की भावना के अनुरूप नहीं बताते हुए वहां नमाज पढ़ने से इनकार कर दिया और पुनः सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

    सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने दलील दी कि प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई गई जगह भोजशाला परिसर से काफी दूर है। उनके अनुसार सड़क मार्ग से इसकी दूरी लगभग 1.3 किलोमीटर और सीधी दूरी करीब 900 मीटर है, इसलिए इसे “भोजशाला के पास” नहीं माना जा सकता।

    ‘यलो साइट’ को माना उपयुक्त स्थान

    सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान नक्शे में दर्शाई गई ‘यलो साइट’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह विवादित परिसर के पीछे स्थित सर्वे नंबर 596 की जमीन है, जहां अलग प्रवेश मार्ग उपलब्ध है। मुस्लिम पक्ष ने भी इस स्थान पर सहमति जताई, जिसके बाद अदालत ने इसे शुक्रवार की नमाज के लिए उपयुक्त स्थान घोषित किया।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फिलहाल शुक्रवार को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज इसी स्थान पर अदा की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई 5 अगस्त को निर्धारित की गई है।

    धार्मिक अधिकारों की रक्षा राज्य की जिम्मेदारी : सुप्रीम कोर्ट

    सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता संवैधानिक अधिकार है और कानून-व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। केवल संभावित विवाद का हवाला देकर किसी समुदाय के धार्मिक अधिकारों को रोका नहीं जा सकता।

    अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में दोनों पक्ष आपसी सहमति से कोई अन्य उपयुक्त स्थान तय कर लेते हैं, तो उस पर भी कोई आपत्ति नहीं होगी।

    सरकार ने कानून-व्यवस्था पर दिया जोर

    सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश सरकार ने मुख्य रूप से कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर अपना पक्ष रखा। सरकार ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर दोनों पक्षों की सहमति से किसी निजी भूमि को भी वैकल्पिक स्थान के रूप में तलाशा जा सकता है।

    धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप प्रशासन क्षेत्र का निरीक्षण करेगा और मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों से चर्चा के बाद अंतिम व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

     

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