विधानसभा में सरकार का खुलासा: 2653 प्राथमिक कृषि साख समितियां घाटे में
भोपाल। मध्य प्रदेश की सहकारी समितियों में लोकतांत्रिक व्यवस्था पिछले 13 साल से ठप पड़ी हुई है। विधानसभा में विधायक आशीष गोविंद शर्मा के सवाल के लिखित जवाब में सरकार ने स्वीकार किया है कि वर्ष 2013 के बाद से प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) के चुनाव नहीं कराए गए हैं। इसके चलते प्रदेश की अधिकांश सहकारी समितियां निर्वाचित संचालक मंडल के बजाय प्रशासकों के जरिए संचालित हो रही हैं।
सरकार के अनुसार मध्य प्रदेश में कुल 4,553 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां संचालित हैं। इनमें से केवल 19 समितियों में ही निर्वाचित संचालक मंडल कार्यरत हैं, जबकि शेष समितियों का संचालन प्रशासकों के माध्यम से किया जा रहा है।
2653 सहकारी समितियां घाटे में
विधानसभा में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश की 2,653 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां घाटे में चल रही हैं। इन सभी समितियों में प्रशासक नियुक्त हैं। लंबे समय से चुनाव नहीं होने के कारण सहकारी संस्थाओं की स्वायत्तता, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सहकारी समितियों में चुनाव नहीं कराए जाने से किसानों की भागीदारी प्रभावित हो रही है। सहकारी संस्थाएं किसानों को कृषि ऋण, खाद-बीज वितरण और अन्य जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में निर्वाचित प्रतिनिधियों के अभाव में व्यवस्था की कार्यक्षमता पर असर पड़ रहा है।
किसानों की भागीदारी पर सवाल
सहकारी समितियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं। इनमें किसानों द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों के माध्यम से फैसले लिए जाते हैं, लेकिन लंबे समय से चुनाव नहीं होने के कारण निर्णय प्रक्रिया में आम सदस्यों की भूमिका सीमित हो गई है।
सरकार ने विधानसभा में समितियों की वर्तमान स्थिति की जानकारी तो दी है, लेकिन चुनाव कराने की कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई है। अब सहकारिता क्षेत्र से जुड़े संगठनों और विपक्ष ने प्रदेश में जल्द चुनाव कराने की मांग तेज कर दी है।


