बालाघाट। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के किरनापुर में मंगलवार को प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी आमने-सामने आ गए। मरार माली समाज के आह्वान पर आयोजित धरना प्रदर्शन के बाद निकली रैली के दौरान विवाद बढ़ गया। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज कर भीड़ को तितर-बितर किया। प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी की बात भी सामने आई है।
चौधरी दंपती से कथित मारपीट के विरोध में प्रदर्शन
मरार माली समाज के लोग टिमकीटोला निवासी कैलाश चौधरी और उनकी पत्नी के साथ कथित पुलिस मारपीट के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे। समाज का आरोप है कि पोस्ट ऑफिस में चोरी के मामले की जांच के दौरान चौधरी दंपती को किरनापुर थाने लाया गया था, जहां उनके साथ पुलिसकर्मियों ने मारपीट की।
प्रदर्शनकारियों ने मामले की निष्पक्ष जांच, दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय देने की मांग की।
रैली के दौरान अचानक बिगड़े हालात
धरने के बाद प्रदर्शनकारियों ने रैली निकाली। इसी दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच विवाद बढ़ गया। दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी की बात सामने आने के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। पुलिस की कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारियों को मौके से खदेड़ दिया गया।
पहले ही चार पुलिसकर्मी निलंबित
चौधरी दंपती से कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा ने चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया था। इनमें उपनिरीक्षक दामेन्द्र तुरकर, प्रधान आरक्षक आशीष बघेल, आरक्षक कपिल बघेल और महिला आरक्षक मेघा टेकाम शामिल हैं।
मामले की जांच के लिए डीएसपी प्रतिष्ठा राठौर के नेतृत्व में चार सदस्यीय एसआईटी भी गठित की गई है। पीड़ित महिला ने आरोप लगाया है कि रात में किरनापुर थाने में पुरुष पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मारपीट की। इन आरोपों की जांच एसआईटी कर रही है।
आज का बवाल भी जांच के घेरे में
किरनापुर में मंगलवार को हुआ बवाल अब मामले को नया मोड़ दे रहा है। एक ओर समाज चौधरी दंपती के साथ कथित पुलिस ज्यादती का आरोप लगा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी के आरोप सामने आए हैं।
अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी किस परिस्थिति में हुई और पुलिस को लाठीचार्ज व आंसू गैस का इस्तेमाल क्यों करना पड़ा। पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर नजर रहेगी।


