नई दिल्ली। BRICS Summit 2026: राजधानी नई दिल्ली में शनिवार से 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का आगाज हो रहा है। भारत की मेजबानी में हो रहे इस सम्मेलन पर पूरी दुनिया की नजर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत BRICS के प्रमुख नेता एक मंच पर नजर आएंगे। जिनपिंग की भारत यात्रा करीब सात साल बाद हो रही है और सम्मेलन से इतर मोदी-जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक को भी बेहद अहम माना जा रहा है।
भारत की अध्यक्षता में हो रहे इस शिखर सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात समेत 11 सदस्य देश शामिल हैं। रूस के राष्ट्रपति पुतिन पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं और 11 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत भी हुई।
दुनिया की करीब आधी आबादी BRICS में
BRICS की ताकत सिर्फ सदस्य देशों की संख्या में नहीं, बल्कि उनकी विशाल आबादी और अर्थव्यवस्था में भी है। 11 सदस्य देश मिलकर दुनिया की करीब आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। क्रय शक्ति समानता (PPP) के आधार पर BRICS की संयुक्त अर्थव्यवस्था वैश्विक अर्थव्यवस्था का करीब 40 प्रतिशत हिस्सा है।
यही वजह है कि BRICS अब केवल उभरती अर्थव्यवस्थाओं का आर्थिक समूह नहीं रह गया है, बल्कि वैश्विक राजनीति और आर्थिक व्यवस्था में प्रभावशाली मंच के रूप में देखा जा रहा है।
मोदी-पुतिन की बैठक, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी पर जोर
BRICS सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, परमाणु सहयोग, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। भारत और रूस ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने की दिशा में काम करने पर भी जोर दिया है।
गलवान के बाद भारत में पहली मोदी-जिनपिंग मुलाकात
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा को भी BRICS सम्मेलन की सबसे बड़ी कूटनीतिक घटनाओं में माना जा रहा है। उनकी भारत यात्रा सात साल बाद हो रही है। मोदी-जिनपिंग की प्रस्तावित बैठक में सीमा विवाद, व्यापार घाटा, बाजार पहुंच और दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को आगे बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा की संभावना है।
भारत और चीन के संबंधों में 2020 के गलवान संघर्ष के बाद लंबे समय तक तनाव रहा। हालांकि, हाल के वर्षों में सीमा पर तनाव कम करने और द्विपक्षीय संवाद को आगे बढ़ाने की कोशिशें हुई हैं। ऐसे में BRICS सम्मेलन दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संवाद का महत्वपूर्ण अवसर बन गया है।
डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश
BRICS के एजेंडे में वैश्विक वित्तीय व्यवस्था भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। सदस्य देश आपसी कारोबार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल को बढ़ाने और सीमा पार भुगतान को आसान बनाने की दिशा में सहयोग बढ़ाना चाहते हैं।
BRICS के भीतर डिजिटल भुगतान व्यवस्था और वित्तीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, अभी समूह की कोई एक साझा मुद्रा या एकीकृत भुगतान प्रणाली नहीं है।
भारत भी BRICS के मंच से डिजिटल भुगतान, वित्तीय सहयोग और वैश्विक दक्षिण की अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापार को आसान बनाने पर जोर दे रहा है।
दिल्ली में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था
BRICS सम्मेलन को देखते हुए राजधानी दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी की गई है। विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों की आवाजाही को देखते हुए पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक इंतजाम किए हैं। दिल्ली में करीब 30 हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है और प्रमुख होटलों, आयोजन स्थल तथा वीवीआईपी रूट पर विशेष निगरानी रखी जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियां वाहनों और संवेदनशील स्थानों की जांच के लिए स्निफर डॉग समेत आधुनिक सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल कर रही हैं।
BRICS का बढ़ता वैश्विक प्रभाव
BRICS की शुरुआत ब्राजील, रूस, भारत और चीन के समूह के रूप में हुई थी। दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS हुआ। इसके बाद समूह का विस्तार हुआ और अब इसमें 11 सदस्य देश शामिल हैं। समूह का उद्देश्य आर्थिक, राजनीतिक और अन्य क्षेत्रों में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना तथा वैश्विक संस्थानों में विकासशील देशों की भूमिका को मजबूत करना है।
भारत की अध्यक्षता में 2026 का BRICS सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव, व्यापारिक प्रतिस्पर्धा, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को लेकर बड़े बदलाव चल रहे हैं। ऐसे में दिल्ली सम्मेलन BRICS के भविष्य की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


