भोपाल। मप्र के पुलिस महानिदेशक (DGP) कैलाश मकवाणा ने कहा कि पुलिस अधिकारी की वास्तविक पहचान उसके नैतिक मूल्यों, विश्वसनीयता, ईमानदारी और जनसेवा की भावना से होती है। उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज के प्रति आजीवन जिम्मेदारी है।
पुलिस मुख्यालय भोपाल में सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी, हैदराबाद से मध्यप्रदेश भ्रमण पर आए 21 प्रशिक्षु IPS अधिकारियों ने डीजीपी श्री कैलाश मकवाणा से सौजन्य भेंट की। यह दल भारत दर्शन (Study-cum-Cultural Tour) के तहत मध्यप्रदेश पहुंचा है। इसमें 19 भारतीय प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारियों के साथ मॉरीशस और नेपाल के दो विदेशी पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं।
डीजीपी श्री मकवाणा ने प्रशिक्षु अधिकारियों का स्वागत करते हुए उन्हें भारतीय पुलिस सेवा में चयन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि अधिकारी यदि ईमानदारी, समर्पण और संवेदनशीलता के साथ कार्य करेंगे तो उन्हें अपने सेवाकाल में सबसे बड़ी संतुष्टि जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने से मिलेगी।
तकनीक के साथ मूलभूत पुलिसिंग जरूरी
डीजीपी ने कहा कि वर्तमान समय में पुलिसिंग तेजी से तकनीक आधारित हो रही है, लेकिन मूलभूत पुलिसिंग के सिद्धांतों को हमेशा प्राथमिकता देनी होगी। आधुनिक तकनीक और पारंपरिक पुलिसिंग के बेहतर समन्वय से ही प्रभावी कानून व्यवस्था स्थापित की जा सकती है।
उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों को सलाह दी कि कानून और नियमों के अनुरूप निष्पक्ष निर्णय लें तथा आम जनता की शिकायतों को संवेदनशीलता से सुनकर उनका समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करें।
गलत निर्णय से वर्षों की छवि हो सकती है प्रभावित
डीजीपी मकवाणा ने कहा कि पुलिस अधिकारी की सबसे बड़ी पूंजी उसकी विश्वसनीयता होती है। नैतिकता और सत्यनिष्ठा से बनी पहचान को बनाए रखना प्रत्येक अधिकारी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि अच्छी छवि बनाने में वर्षों लगते हैं, लेकिन एक गलत निर्णय या आचरण से यह पलभर में प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा में चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन धैर्य, विवेक और सकारात्मक सोच के साथ हर परिस्थिति का सामना करना चाहिए। अच्छे कार्य करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहित करें और अनुशासनहीनता पर निष्पक्ष कार्रवाई करें।
MP पुलिस की कार्यप्रणाली से कराया परिचय
इस अवसर पर विशेष पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) श्री रवि कुमार गुप्ता ने प्रशिक्षु अधिकारियों को मध्यप्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली, प्रशिक्षण व्यवस्था, जनभागीदारी आधारित पुलिसिंग और नवाचारों की जानकारी दी। उन्होंने दस्यु उन्मूलन और नक्सल समस्या नियंत्रण में मध्यप्रदेश पुलिस की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।
प्रशिक्षु अधिकारियों को मध्यप्रदेश पुलिस के जनजागरूकता अभियानों “नशे से दूरी है जरूरी 2.0” और “सेफ क्लिक 2.0” पर आधारित वीडियो दिखाए गए। अधिकारियों को इन अभियानों की अवधारणा, जनसहभागिता और सामाजिक प्रभाव की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में प्रशिक्षु IPS अधिकारियों ने पुलिसिंग, नेतृत्व क्षमता, तकनीक आधारित अपराध नियंत्रण और सामुदायिक पुलिसिंग से जुड़े सवाल पूछे, जिनका अधिकारियों ने विस्तार से समाधान किया।
इस अवसर पर उप पुलिस महानिरीक्षक प्रशिक्षण मनीष अग्रवाल, उप निदेशक पुलिस अकादमी भौंरी रामजी श्रीवास्तव सहित पुलिस मुख्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


