अगर आप सोचते हैं कि कान सिर्फ सुनने का काम करते हैं, तो यह पूरी सच्चाई नहीं है। कान सुनने के साथ-साथ शरीर का संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यही वजह है कि कान में होने वाली छोटी-सी समस्या भी सुनने की क्षमता और दैनिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है। आजकल लंबे समय तक ईयरफोन और ईयरबड्स के उपयोग, स्वच्छता की कमी और संक्रमण के बढ़ते मामलों के कारण कान संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में कान के संक्रमण के शुरुआती संकेतों को पहचानना बेहद जरूरी है।
लगातार कान दर्द हो सकता है खतरे की घंटी
कान में दर्द संक्रमण का सबसे सामान्य लक्षण माना जाता है। यह दर्द हल्के दबाव से लेकर तेज चुभन तक हो सकता है। संक्रमण के दौरान कान के अंदर तरल पदार्थ जमा होने लगता है, जिससे दबाव बढ़ता है और दर्द महसूस होता है। यदि दर्द लंबे समय तक बना रहे या लगातार बढ़ता जाए, तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
सुनाई कम देना या कान बंद लगना
मध्य कान में तरल जमा होने के कारण आवाजें स्पष्ट सुनाई नहीं देतीं। कई लोगों को ऐसा महसूस होता है जैसे कान में पानी भर गया हो या कान बंद हो गया हो। यह भी संक्रमण का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।
बुखार के साथ दिखें ये लक्षण
बैक्टीरिया या वायरस से होने वाले संक्रमण के कारण शरीर का तापमान बढ़ सकता है। खासकर बच्चों में कान के संक्रमण के साथ बुखार देखा जाता है। यदि कान दर्द के साथ बुखार भी हो, तो डॉक्टर की सलाह लेना आवश्यक है।
कान से तरल या पस निकलना
यदि कान से पीले, सफेद या बदबूदार तरल का रिसाव हो रहा है, तो यह संक्रमण का गंभीर संकेत हो सकता है। कुछ मामलों में कान का पर्दा फटने पर भी तरल बाहर निकलता है, जिससे दर्द अस्थायी रूप से कम हो सकता है। हालांकि ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है।
इन संकेतों को भी न करें नजरअंदाज
-कान में भनभनाहट, सीटी या घंटी जैसी आवाज सुनाई देना (टिनिटस)।
-छोटे बच्चों का बार-बार रोना, कान खुजलाना या नींद में परेशानी होना।
-जुकाम या श्वसन संक्रमण के बाद कान दर्द, बुखार या सुनने में कमी महसूस होना।
-चक्कर आना या संतुलन बिगड़ना।
कब लें डॉक्टर की सलाह?
यदि कान दर्द 24 से 48 घंटे से अधिक बना रहे, सुनाई कम दे, बुखार आए या कान से तरल निकलने लगे, तो तुरंत विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करें। समय पर इलाज से संक्रमण को बढ़ने और सुनने की क्षमता पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से बचाया जा सकता है।


