तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। मध्य पूर्व में तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिका ने मंगलवार को लगातार 10वीं रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। ईरानी मीडिया के अनुसार दक्षिणी ईरान के सीरिक, बंदर अब्बास, क़ेश्म द्वीप, चाबहार और कोनारक समेत कई क्षेत्रों में जोरदार विस्फोट हुए।
दूसरी ओर, ईरान ने दावा किया है कि उसने कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन हमलों से निशाना बनाया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है।
कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले का दावा
ईरानी सेना के अनुसार कैंप अरिफजान, कैंप अल-अदीरी और अहमद अल-जाबेर एयरबेस पर कामिकाजे ड्रोन से हमला किया गया। वहीं, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि इन हमलों में अमेरिकी एयर डिफेंस और रडार सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचाया गया।
ईरानी मीडिया के मुताबिक हमलों में पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम, अर्ली वॉर्निंग रडार, AN/TPS-117 रडार और सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम को निशाना बनाया गया।
होर्मुज स्ट्रेट में ऑयल टैंकर पर हमला
इस बीच ओमान के लिमाह तट के पास होर्मुज स्ट्रेट में एक ऑयल टैंकर पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार हमले के बाद चालक दल ने जहाज छोड़कर लाइफबोट के जरिए सुरक्षित स्थान पर शरण ली।
हूतियों ने सऊदी जहाजों की नाकेबंदी का ऐलान किया
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की है। हूतियों ने कहा कि बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य अब सऊदी जहाजों के लिए बंद रहेगा और इस मार्ग से गुजरने वाले सभी सऊदी जहाज उनके निशाने पर होंगे।
यह जलमार्ग वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के लगभग 10 प्रतिशत समुद्री व्यापार का आवागमन इसी मार्ग से होता है। ऐसे में इस घोषणा से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
अमेरिका बोला- 10वीं स्ट्राइक सफल रही
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की कि उसने ईरान के खिलाफ लगातार 10वीं सैन्य कार्रवाई पूरी कर ली है। अमेरिकी सेना के अनुसार अभियान के दौरान सैन्य कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट्स, समुद्री सैन्य ठिकानों तथा एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया गया।
मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य टकराव के बीच वैश्विक समुदाय की नजर अब इस बात पर है कि यह संघर्ष आगे किस दिशा में बढ़ता है।


