भोपाल। कायस्थ समाज की अग्रणी संस्था कायस्थम मध्य प्रदेश द्वारा रविवार को पार्श्व गायक स्व. मुकेश चंद्र माथुर के 103वें जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित फिल्मी गीतों के कार्यक्रम ‘रिमझिम गिरे सावन 2.0’ में सुरों की ऐसी फुहार बही कि पूरा सभागार सदाबहार गीतों से गूंज उठा। कार्यक्रम में मुकेश, किशोर कुमार, मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर और आशा भोसले के लोकप्रिय गीतों की शानदार प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को पुराने सुनहरे दौर की यादों में पहुंचा दिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना तथा विशिष्ट अतिथि मध्यप्रदेश काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के महानिदेशक अनिल कोठारी, वरिष्ठ पत्रकार महेश श्रीवास्तव और प्रसिद्ध भजन गायक रवि खरे रहे। अतिथियों ने भगवान श्री चित्रगुप्त, मां सरस्वती और स्व. मुकेश के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर सभी 30 चित्रांश गायकों का स्वागत भी किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत कॉन्वेंट स्कूल ईदगाह की छात्रा वंशिका श्रीवास्तव द्वारा सरस्वती वंदना से हुई, जबकि इटली से आई छात्रा रिया सक्सेना ने भगवान श्री चित्रगुप्त के मंत्रों का वाचन किया। दोनों छात्राओं को संस्था की ओर से सम्मानित भी किया गया। आयोजन समिति की ओर से महासचिव डॉ. रश्मि सक्सेना, राकेश रायजादा, संजय खरे, रत्ना खरे और उमंग खरे ने अतिथियों का स्वागत किया। संस्था के अध्यक्ष प्रलय श्रीवास्तव, उपाध्यक्ष आर.पी. श्रीवास्तव, सुरेश श्रीवास्तव और अजय कुमार श्रीवास्तव ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट किए।
वरिष्ठ पत्रकार महेश श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में कहा कि स्व. मुकेश केवल एक गायक नहीं, बल्कि आम आदमी की पीड़ा, संघर्ष और संवेदनाओं की आवाज थे। उन्होंने कहा कि 50 और 60 के दशक में मुकेश ने अपने गीतों के माध्यम से समाज की भावनाओं को जीवंत किया और संगीत साधना के लिए कठोर तपस्या आवश्यक होती है।
संगीत संध्या में लगभग 30 चित्रांश गायकों ने 42 से अधिक लोकप्रिय फिल्मी गीत प्रस्तुत किए, जिनमें 17 गीत केवल स्व. मुकेश को समर्पित रहे। डॉ. यू.डी. सक्सेना एवं डॉ. स्मिता सक्सेना ने “सावन का महीना पवन करे शोर” प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शुरुआत को यादगार बनाया। के.के. सहाय ने फिल्म अंदाज का “झूम-झूम के नाचो आज”, जबकि डॉ. राजेश ब्यौहार एवं डॉ. विजया ब्यौहार ने हरियाली और रास्ता का “इब्तदाए इश्क में हम सारी रात जागे” प्रस्तुत किया।
हर्षवर्धन श्रीवास्तव और डॉ. ज्योत्स्ना श्रीवास्तव ने मिलन फिल्म का “हम तुम युग-युग से ये गीत मिलन के गाते रहेंगे” गाकर खूब तालियां बटोरीं। रत्ना खरे और राकेश रायजादा ने “ये पर्वतों के दायरे”, जबकि अवनीश रायजादा और प्रदीप रायजादा ने “कैसी हंसी आज बहारों की रात है” प्रस्तुत कर समां बांध दिया।
इसके अलावा संजय खरे ने “तेरी निगाहों पर मर-मर गए हम”, अरुण श्रीवास्तव ने “चंदन सा बदन”, राकेश श्रीवास्तव ने “रात कली एक ख्वाब में आई”, रागिनी श्रीवास्तव ने “नैनों में बदरा छाए”, संगीता सक्सेना ने “बोल रे पपीहरा”, अनुराग श्रीवास्तव ने “तेरी दुनिया से होकर मजबूर चला”, निशि सक्सेना एवं विजय सक्सेना ने “तेरे चेहरे से नजर नहीं हटती”, ऋतु सक्सेना ने “एक प्यार का नगमा है”, मुकुंद श्रीवास्तव ने “आज की रात मेरे दिल की सलामी ले ले”, शैलेश श्रीवास्तव ने “जीना यहां, मरना यहां”, विजय सक्सेना ने “कहीं दूर जब दिन ढल जाए”, रत्ना खरे ने “आंखों से जो उतरी है दिल में”, राजीव श्रीवास्तव ने “सजनवा बैरी हो गए हमार”, राजीव श्रीवास्तव और बृजेश सक्सेना ने “तोबा ये मतवाली चाल”, जबकि कमोद और कविता सक्सेना ने “वो परी कहां से लाऊं” प्रस्तुत कर स्व. मुकेश को संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम के अंत में शुभेन्दु शशांक श्रीवास्तव की ओर से सभी गायकों को स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए। आभार प्रदर्शन संस्था के उपाध्यक्ष सुरेश श्रीवास्तव ने किया।


