तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। होर्मुज स्ट्रेट के पास ओमान के समुद्री क्षेत्र में दो तेल टैंकरों पर हुए मिसाइल हमले में एक भारतीय क्रू मेंबर की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य लोग घायल हो गए। इस बीच अमेरिका ने लगातार तीसरी रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए और ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी दोबारा शुरू करने की घोषणा की है।
रिपोर्ट के अनुसार, मोंबासा और अल बहिया नामक तेल टैंकरों को दो क्रूज मिसाइलों से निशाना बनाया गया। हमले के बाद दोनों जहाजों को नुकसान पहुंचा और चालक दल के कई सदस्य घायल हुए।
अमेरिका का तीसरी रात भी हमला
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, ताजा एयरस्ट्राइक का मकसद ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और होर्मुज स्ट्रेट में व्यावसायिक जहाजों तथा नागरिक समुद्री यातायात पर हमले की उसकी क्षमता को कम करना है।
CENTCOM ने बताया कि मंगलवार से अमेरिकी नौसेना ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी फिर शुरू करेगी। हालांकि, जो जहाज निर्धारित नियमों का पालन करेंगे, उन्हें क्षेत्रीय समुद्री मार्गों से गुजरने की अनुमति दी जाएगी।
पिछले 24 घंटे की बड़ी घटनाएं
- ट्रम्प का नया ऐलान: होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कार्गो जहाजों पर 20 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा की। साथ ही ईरानी जहाजों और उनसे जुड़े ग्राहकों पर नए प्रतिबंध लगाए।
- ईरानी नौसैनिक ठिकानों पर हमला: अमेरिका ने बंदर अब्बास स्थित सबमरीन और नौसैनिक मेंटेनेंस सुविधा पर सी-ड्रोन से हमला कर समुद्री सैन्य ढांचे को निशाना बनाया।
- ईरान का जवाब: सुप्रीम लीडर के सलाहकार मोहम्मद मोखबर ने कहा कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा और अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।
- रूस की गतिविधि तेज: दावा किया गया कि रूस का विशेष कमांड एयरक्राफ्ट Tu-214 तेहरान पहुंचा है, जिसका उपयोग युद्ध जैसी स्थिति में कमांड सेंटर के रूप में किया जाता है।
ट्रम्प बोले- ईरान दशकों पीछे चला गया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि हालिया सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार, अमेरिकी हमलों में 159 सैन्य जहाज, 200 सैन्य विमान, कई रडार, एयर डिफेंस सिस्टम और हथियार निर्माण से जुड़ा बड़ा ढांचा नष्ट हो चुका है।
ट्रम्प ने यह भी कहा कि ईरान की हथियार उत्पादन क्षमता का लगभग 84 प्रतिशत हिस्सा खत्म हो चुका है, हालांकि उसके पास अभी भी कुछ मिसाइलें और सीमित सैन्य संसाधन मौजूद हैं।
5 घंटे चला अमेरिकी सैन्य अभियान
CENTCOM के अनुसार, करीब पांच घंटे तक चले अभियान में बुशहर, चाबहार, जास्क, कोनारक, अबू मूसा और बंदर अब्बास स्थित सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले किए गए। इन हमलों में तटीय रक्षा प्रणाली, मिसाइल और ड्रोन बेस सहित कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया।
अमेरिका ने यह भी बताया कि फिलहाल मध्य पूर्व में उसके 50 हजार से अधिक सैनिक तैनात हैं और क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।


