ग्लास्गो। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की शुरुआत से पहले भारतीय दल को बड़ा झटका लगा है। एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन के कारण भारत का वेटलिफ्टिंग कोटा 12 से घटाकर 11 कर दिया गया है। इसके चलते वेटलिफ्टर दिलबाग सिंह को टीम से बाहर होना पड़ा। वहीं, जूडो खिलाड़ी अरुण कुमार भी डोप टेस्ट में फेल होने के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स से बाहर हो गए हैं।
डोपिंग मामलों के कारण घटा भारत का वेटलिफ्टिंग कोटा
भारतीय वेटलिफ्टिंग महासंघ ने पहले 12 सदस्यीय टीम का चयन किया था, जिसकी अगुआई ओलंपिक रजत पदक विजेता मीराबाई चानू कर रही हैं। हालांकि, गेम्स से ठीक पहले महासंघ को जानकारी मिली कि लगातार डोपिंग उल्लंघनों के कारण भारत का कोटा घटाकर 11 खिलाड़ी कर दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, यह सूचना बुधवार को मिली, जिसके बाद टीम में बदलाव करते हुए दिलबाग सिंह का नाम हटाने का फैसला लिया गया।
दिलबाग सिंह की चोट भी बनी वजह
जानकारी के मुताबिक, दिलबाग सिंह पिछले कुछ समय से पीठ की चोट से परेशान थे। बर्मिंघम में आयोजित प्रशिक्षण शिविर के दौरान भी वह अभ्यास नहीं कर सके थे। ऐसे में कोटा कम होने और उनकी फिटनेस को देखते हुए उन्हें टीम से बाहर करना पड़ा।
इन डोपिंग मामलों का पड़ा असर
भारत के वेटलिफ्टिंग कोटे में कटौती की वजह क्वालिफिकेशन अवधि के दौरान सामने आए कई डोपिंग मामले हैं। इनमें-
- एन अजित (71 किग्रा)
- साईराज परदेशी (88 किग्रा)
- हरचरण सिंह (110 किग्रा)
को डोपिंग उल्लंघन के कारण प्रतिबंधित किया गया। वहीं, महिला वेटलिफ्टर वंशिता वर्मा (86 किग्रा) के खिलाफ भी एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन का मामला दर्ज हुआ। इन मामलों का सीधा असर भारत के कोटे पर पड़ा।
जूडो खिलाड़ी अरुण कुमार भी बाहर
भारत को दूसरा बड़ा झटका जूडो में लगा। अरुण कुमार आउट-ऑफ-कॉम्पिटिशन डोप टेस्ट में फेल हो गए। उनके सैंपल में एनाबॉलिक स्टेरॉयड मिलने के बाद उन्हें कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 से बाहर कर दिया गया।
जूडो प्रतियोगिताएं 31 जुलाई से शुरू होंगी और अरुण कुमार भारत के प्रमुख पदक दावेदारों में गिने जा रहे थे।
पदक उम्मीदों पर असर
वेटलिफ्टिंग कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के सबसे सफल खेलों में शामिल रहा है। ऐसे में कोटा कम होने और दो खिलाड़ियों के बाहर होने से भारत की पदक संभावनाओं को झटका लगा है। हालांकि, मीराबाई चानू, बिंदियारानी देवी और अन्य अनुभवी खिलाड़ी अब भी भारतीय दल की सबसे बड़ी उम्मीद बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि डोपिंग मामलों पर सख्ती और खिलाड़ियों में जागरूकता बढ़ाना भविष्य में ऐसे नुकसान से बचने के लिए बेहद जरूरी होगा।


