Naradji kahin—Mahesh Dixit
महेश दीक्षित
मप्र कांग्रेस के एक माननीय इन दिनों राजनीति से ज्यादा अपने दिल के मामलों को लेकर चर्चा में हैं। हालात ऐसे बन गए कि उनके रंगीन मिजाज ने घर की चौखट तक हिला दी और मामला रिश्तों से निकलकर अदालत तक पहुंच गया। बताते हैं कि जिस खास सुंदरी के कारण घर-गृहस्थी में तूफान आया, उसने भी बीच राह में माननीय का साथ छोड़ दिया और किसी दूसरे ठिकाने की राह पकड़ ली। अब चर्चा है कि माननीय का दिल फिर से नई दिशा में उड़ान भर रहा है। उनके करीबी बताते हैं कि चुनाव जीतने के बाद से क्षेत्र की समस्याओं से ज्यादा दिल की गतिविधियां ही उनकी प्राथमिकता बनी हुई हैं। एक रिश्ता गया तो दूसरा, दूसरा गया तो तीसरा… मानो दिल का लोकतंत्र पूरी मजबूती से चल रहा हो। माननीय की यह ‘जनसेवा’ इन दिनों महाकौशल से लेकर राजधानी तक राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। दिल जब जनसेवा से ज्यादा ‘दिल रूबाओं’ में व्यस्त होगा, तो चर्चा होना स्वाभाविक है।
इसी हफ्ते आएगी भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी!
मप्र भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी का इंतजार अब लगभग उतना ही लंबा हो गया है, जितना किसी बड़े सरकारी फैसले का होता है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को पद संभाले करीब एक वर्ष होने जा रहा है, लेकिन उनकी टीम का गठन अब तक नहीं हो सका है। सूत्रों के अनुसार कार्यकारिणी की सूची काफी पहले तैयार हो चुकी थी, लेकिन कुछ बड़े नेताओं के बीच नामों को लेकर चली खींचतान के कारण इसकी घोषणा टलती रही। कई बार संकेत दिए गए कि सूची जल्द जारी होगी, लेकिन हर बार तारीख आगे बढ़ती गई। अब चर्चा है कि दिल्ली स्तर पर अधिकांश नामों को मंजूरी मिल चुकी है और इसी सप्ताह प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा हो सकती है। नई कार्यकारिणी में 100 से 150 तक पदाधिकारी, सदस्य और विशेष आमंत्रित शामिल किए जा सकते हैं। ऐसे में भाजपा कार्यकर्ताओं को उम्मीद है कि लंबे समय से सुनाई दे रहा ‘जल्द घोषणा होगी’ का वाक्य अब आखिरकार ‘घोषणा हो गई’ में बदल जाएगा।
‘बास’ के तेवर आखिर क्यों ठंडे पड़ गए?
मालवा की राजनीति के अहम और प्रभावशाली नेता, जिन्हें ‘बास’ के नाम से जाना जाता है और जो सरकार में वरिष्ठ मंत्री भी हैं, के तेवर इन दिनों कुछ नरम -नरम हो रहे हैं। कई दिनों तक कैबिनेट बैठकों से दूरी बनाकर राजनीतिक संदेश देने वाले ‘बास’ जब अचानक नियमित रूप से बैठकों में शामिल होने लगे, तो सियासी गलियारों में सवाल गूंजने लगा कि यह वापसी मन से है या मजबूरी में? दरअसल, दिल्ली से शीर्ष नेतृत्व का सख्त संदेश आने के बाद राजनीतिक समीकरण बदल गए। हाईकमान ने स्पष्ट संकेत दे दिया कि प्रदेश के मुखिया के साथ तालमेल बनाकर चलना होगा, अन्यथा साइडलाइन होने के लिए तैयार रहना पड़ेगा। इसके बाद से नाराजगी की राजनीति कर रहे ‘मालवा के बास’ अचानक अनुशासन की राह पर चलते नजर आने लगे हैं। नारदजी कहते हैं कि मौजूदा हालात में ‘बास’ के पास शांति धारण करने के अलावा दूसरा विकल्प भी क्या बचा है?
हेलीकॉप्टर वाले पाठकजी अब ‘स्कूटर मोड’ में!
कटनी के सर्वशक्तिमान पाठकजी इन दिनों अपनी ही सरकार में सबसे ज्यादा असहज नेताओं में गिने जा रहे हैं। कभी सत्ता के बेहद प्रभावशाली चेहरों में शामिल रहने वाले पाठकजी अब ऐसे दौर से गुजर रहे हैं, जहां मंच से नाम कटने के बाद भी खुलकर नाराजगी जताने की स्थिति में नहीं दिखते। पिछले दिनों ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ में पहले उन्हें मुख्य अतिथि बनाया गया, लेकिन कुछ घंटों बाद ही आदेश बदलकर प्रदेश के संस्कृति मंत्री को आगे कर दिया गया। इज्जत बचाने की कवायद में पाठकजी ने कटनी में अलग कार्यक्रम आयोजित किया और स्कूटर पर सवार होकर शक्ति प्रदर्शन करते नजर आए। मगर कार्यक्रम में खाली कुर्सियां और भाजपा नेताओं की बेरुखी बहुत कुछ कह गईं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि करोड़ों की रिकवरी, खनन विवाद और सरकारी जांचों की तलवार के बीच पाठकजी अब खुलकर टकराव का जोखिम नहीं लेना चाहते। यही वजह है कि लगातार हो रही किरकिरी के बावजूद वे सार्वजनिक रूप से यही कहते फिर रहे हैं कि ‘सब ठीक है।’
कलेक्टर साहिबा से भाजपा नेता परेशान!
ग्वालियर-चंबल संभाग के एक जिले कलेक्टर साहिबा के रूआब और कार्यशैली के राजधानी के राजनीतिक-प्रशासनिक गलियारों में चर्चे हैं। चर्चे हों भी क्यों न? बताते हैं कि जब से मैडम ने कलेक्टरी संभाली है, तब से उनके कार्यशैली में ‘चंबल का पानी’ बोलने लगा है। हालात यह हैं कि जिले के भाजपा नेताओं की कलेक्टर साहिबा ने ‘खटिया’ खड़ी कर रखी है। कलेक्टर से मिलने के लिए भाजपा नेताओं को घंटों चेंबर के बाहर इंतजार करना पड़ रहा है। नारदजी को कलेक्टर साहिबा से दुखी भाजपा के जिला पदाधिकारी बताते हैं कि, हमारी सरकार है, और हमारी ही सुनवाई नहीं हो रही है। क्या गजब है…सीएम सचिवालय तक शिकायत करने के बाद भी कलेक्टर साहिबा ‘चंबल की रानी’ बनी हुई हैं।


