भोपाल। भोपाल की चर्चित मॉडल एवं अभिनेत्री त्विषा शर्मा की आत्महत्या के मामले में आरोपी पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ के समक्ष दोनों पक्षों की ओर से दो चरणों में मैराथन बहस हुई। सीबीआई और राज्य सरकार ने जांच प्रभावित करने तथा साक्ष्य मिटाने के प्रयास का आरोप लगाते हुए जमानत का विरोध किया। वहीं, बचाव पक्ष ने साक्ष्यों के अभाव, आरोपी की उम्र और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला देकर राहत देने की मांग की।
पांच महीने से न्यायिक हिरासत में हैं गिरिबाला सिंह
मामले के अनुसार, भोपाल की पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की बहू और मॉडल त्विषा शर्मा ने 12 मई को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद पुलिस ने गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ दहेज मृत्यु तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।
गिरिबाला सिंह को 15 मई को भोपाल जिला एवं सत्र न्यायालय से अग्रिम जमानत मिल गई थी। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। मामले में मृतका का दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग को लेकर भी याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की टीम से दोबारा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया था। इसके बाद 27 मई को हाईकोर्ट ने गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत निरस्त कर दी थी।
बाद में राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। वर्तमान में गिरिबाला सिंह न्यायिक हिरासत में हैं और उनकी ओर से नियमित जमानत के लिए याचिका दायर की गई है।
बचाव पक्ष ने साक्ष्यों के अभाव का दिया हवाला
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि सीबीआई ने गिरिबाला सिंह के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने के कारण दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं के तहत आरोपपत्र प्रस्तुत नहीं किया है। याचिकाकर्ता की उम्र और बीमारियों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि वह पिछले पांच महीने से न्यायिक हिरासत में हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए।
सीबीआई और सरकार ने किया जमानत का विरोध
सीबीआई और राज्य सरकार की ओर से जमानत याचिका का विरोध किया गया। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि जब्त किए गए लैपटॉप, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। रिपोर्ट मिलने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले में संबंधित कानूनी धाराएं जोड़ी जा सकती हैं।
अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि सीबीआई अभी मामले की जांच कर रही है और साक्ष्य एकत्र किए जा रहे हैं। आरोप लगाया गया कि याचिकाकर्ता ने जांच में सहयोग नहीं किया तथा साक्ष्य मिटाने का प्रयास किया। ऐसे में जांच पूरी होने और साक्ष्यों की स्थिति स्पष्ट होने से पहले जमानत देना उचित नहीं होगा।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह और सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. जैन ने पैरवी की।
अब इस मामले में हाईकोर्ट के फैसले पर नजर रहेगी।


