नई दिल्ली। OBC Creamy Layer: अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के क्रीमीलेयर नियमों को लेकर असमंजस के कारण भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारियों की ट्रेनिंग करीब दो महीने से अटकी हुई है। प्रशिक्षण अगस्त के तीसरे सप्ताह से शुरू होना था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले की व्याख्या और उसके क्रियान्वयन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने रविवार शाम इस मामले में एक नोट जारी किया। इसमें बताया गया कि केंद्र सरकार चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट करे कि क्रीमीलेयर से जुड़े फैसले को किस तरह लागू किया जाए। विभाग ने सिविल सेवा परीक्षा के पिछले 14 वर्षों के उम्मीदवारों के आंकड़े जुटाकर मामले के विभिन्न पहलुओं का आकलन किया है।
केंद्र सरकार ने इस संबंध में 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। शीर्ष अदालत ने 24 सितंबर को इस पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। हालांकि, फैसले का इंतजार अब भी जारी है। इस देरी के कारण चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति और प्रशिक्षण से जुड़ी प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
माता-पिता की आय ही क्रीमीलेयर का आधार नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को दिए अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि ओबीसी आरक्षण के तहत क्रीमीलेयर तय करने के लिए केवल माता-पिता की आय को आधार नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए माता-पिता या अभिभावकों के पद और सामाजिक स्थिति को भी ध्यान में रखना होगा।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने केंद्र सरकार की अपील खारिज करते हुए दिल्ली, मद्रास और केरल हाईकोर्ट के फैसलों को बरकरार रखा था। अदालत ने यह भी कहा था कि सरकारी कर्मचारियों और निजी क्षेत्र या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) में काम करने वाले कर्मचारियों के बच्चों के साथ आरक्षण के मामले में अलग-अलग व्यवहार करना अनुचित भेदभाव हो सकता है।
सिविल सेवा अभ्यर्थियों को मिली राहत
इस फैसले से उन ओबीसी अभ्यर्थियों को राहत मिली थी, जिन्होंने सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन माता-पिता के वेतन को आधार बनाकर उन्हें क्रीमीलेयर श्रेणी में रखते हुए आरक्षण का लाभ देने से इनकार कर दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने माना था कि संबंधित अभ्यर्थियों को आरक्षण से बाहर करने के लिए अपनाया गया पैमाना उचित नहीं था। अब केंद्र सरकार यह स्पष्टता चाहती है कि फैसले का प्रभाव केवल नई भर्तियों पर लागू होगा या पहले की भर्तियों और चयन प्रक्रियाओं पर भी पड़ेगा।
यही असमंजस आईएएस अधिकारियों की ट्रेनिंग में देरी की प्रमुख वजह बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के स्पष्टीकरण के बाद ही आगे की प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।


