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    Homeमध्यप्रदेशकांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग का प्रदेश प्रभारी आबिद ‘कागजी’ निकला

    कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग का प्रदेश प्रभारी आबिद ‘कागजी’ निकला

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    चेक बाउंस मामले में कोर्ट ने भगोड़ा घोषित किया, ‘कागजी’ की संपत्ति कुर्क करने के आदेश

    भोपाल। मप्र कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश प्रभारी एवं राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर आबिद कागजी एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। राजस्थान के कोटा न्यायालय ने चेक बाउंस के एक पुराने मामले में उन्हें मफरूर (भगोड़ा) घोषित करते हुए उनकी संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी किए हैं। यह मामला सामने आने के बाद कांग्रेस संगठन के भीतर भी ‘कागजी’ की कार्यशैली और चाल-चरित्र को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
    जानकारी के अनुसार, यह मामला वर्ष 2010 में लिए गए 1.20 लाख रुपये के उधार से जुड़ा है। आरोप है कि आबिद कागजी ने रकम लौटाने के लिए जो चेक दिया था, वह वर्ष 2011 में बैंक से बाउंस हो गया। इसके बाद परिवादी नितेश श्रृंगी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। करीब 13 वर्षों से लंबित इस प्रकरण में अदालत ने कई बार ‘कागजी’ को पेश होने के निर्देश दिए, लेकिन वे नियमित रूप से सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए। बताया जा रहा है कि उनके खिलाफ पहले भी कई बार गिरफ्तारी वारंट जारी किए जा चुके हैं।
    हाल ही में भोपाल में आयोजित कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के एक कार्यक्रम में आबिद कागजी ने संगठनात्मक अनुशासन और जमीनी कार्यशैली पर नेताओं को संबोधित किया था। हालांकि उनके संबोधन के तरीके को लेकर कुछ स्थानीय नेताओं ने असहमति भी जताई थी। अब न्यायालय के आदेश के बाद उनके राजनीतिक और संगठनात्मक आचरण को लेकर भी पार्टी में सवाल उठने लगे हैं।
    क्या  है मामला?
    -वर्ष 2010 में 1.20 लाख रुपये उधार लेने का आरोप।
    -2011 में संबंधित चेक बैंक से बाउंस हुआ।
    -13 वर्षों से न्यायालय में विचाराधीन है मामला।
    -कई बार वारंट जारी होने के बावजूद नियमित पेशी नहीं।
    -कोटा न्यायालय ने मफरूर घोषित कर संपत्ति कुर्की के आदेश दिए।
    ‘कागजी’ कार्यशैली को लेकर विवादों में
    इधर, मध्य प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग में उनकी कार्यशैली को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के अनुसार, उन्होंने हाल ही में प्रदेश के नौ जिलों में अस्थायी प्रभारियों की नियुक्ति की है और जिला अध्यक्षों के चयन की प्रक्रिया शुरू कराई है। संगठन के कुछ नेताओं का दावा है कि इन नियुक्तियों की जानकारी प्रदेश अध्यक्ष शेख अलीम को भी नहीं थी।
     राजनीतिक सवाल
    -क्या न्यायालय से भगोड़ा घोषित व्यक्ति को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलनी चाहिए?
    -क्या प्रदेश नेतृत्व को विश्वास में लिए बिना संगठनात्मक फैसले लेना उचित है?
    -क्या इस विवाद का असर कांग्रेस की छवि पर पड़ेगा?

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