राज्य स्तरीय विचार-मंथन में आयुक्त निधि निवेदिता का कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद, उत्कृष्ट मॉडलों को पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी
भोपाल। मध्यप्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों को अधिक प्रभावी, बाल-अनुकूल और आधुनिक बनाने की दिशा में महिला एवं बाल विकास विभाग ने नई पहल शुरू की है। मंगलवार को भोपाल स्थित संचालनालय, महिला एवं बाल विकास में आयोजित राज्य स्तरीय विचार-मंथन कार्यशाला में प्रदेशभर से चयनित सक्रिय और नवाचारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपने अनुभव, सुझाव और जमीनी चुनौतियां साझा कीं।
कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास विभाग की आयुक्त सुश्री निधि निवेदिता ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद किया और उनके अनुभवों को भविष्य की नीतियों एवं प्रशिक्षण व्यवस्था का आधार बनाने पर जोर दिया।
आयुक्त ने कहा कि कार्यशाला में शामिल लगभग 90 प्रतिशत आंगनवाड़ी कार्यकर्ता उच्च शिक्षित हैं। प्रदेश की आंगनवाड़ी व्यवस्था अब नई ऊर्जा, आधुनिक सोच और दक्ष मानव संसाधन के साथ बदलाव के दौर में प्रवेश कर रही है। जमीनी स्तर पर काम करने वाली कार्यकर्ताओं के अनुभव ही प्रशिक्षण, डिजिटल नवाचार और सेवा सुधार की नई दिशा तय करेंगे।
उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता केवल योजनाओं को लागू करने वाली कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास, मातृ स्वास्थ्य, पोषण सुधार और सामाजिक जागरूकता की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। विकसित बचपन ही विकसित मध्यप्रदेश की नींव है और इस लक्ष्य को पूरा करने में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भूमिका सबसे अहम है।
जमीनी सुझावों से तैयार होगी नई रणनीति
आयुक्त निधि निवेदिता ने कहा कि राज्य स्तरीय विचार-मंथन का उद्देश्य केवल चर्चा करना नहीं, बल्कि मैदानी स्तर की वास्तविक परिस्थितियों, प्रशिक्षण जरूरतों, स्थानीय नवाचारों और सेवा प्रदायगी में आने वाली चुनौतियों को समझना है। इन अनुभवों के आधार पर विभाग भविष्य के प्रशिक्षण मॉड्यूल, डिजिटल संसाधन और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों को और अधिक उपयोगी बनाएगा।
कार्यकर्ताओं ने पोषण पुनर्वास, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा, समुदाय की भागीदारी, डिजिटल तकनीक के उपयोग, बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने और कुपोषण उन्मूलन से जुड़े सफल प्रयोग साझा किए।
आयुक्त ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों को संकलित कर उन्हें मॉडल के रूप में अन्य आंगनवाड़ी केंद्रों में लागू किया जाएगा।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने साझा किए नवाचार
देवास जिले की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती शर्मीला ठाकुर ने बताया कि नगर पालिका सभापति द्वारा आंगनवाड़ी केंद्रों को गोद लेकर बच्चों को यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई गई और किशोरियों के कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण भी कराया गया।
वहीं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती शोभा ठाते ने बताया कि केंद्र में सहजन के पेड़ लगाए गए हैं, जिनका उपयोग पोषण सुधार में किया जा रहा है। सहजन की फलियों के बदले समुदाय से पोषण वाटिका के लिए बीज एवं अन्य सामग्री प्राप्त की जा रही है।
मुरैना जिले के नावली-194 आंगनवाड़ी केंद्र पर स्थानीय स्व-सहायता समूहों की मदद से बच्चों के लिए यूनिफॉर्म, जूते, टेबल-कुर्सी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। यहां प्रतिदिन लगभग 30 से 35 बच्चों की उपस्थिति दर्ज हो रही है।


