भोपाल। Bhopal Old Age Home: मध्यप्रदेश के पहले पेड ओल्ड एज होम ‘संध्या छाया’ के संचालन की जिम्मेदारी अब मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम (एमपीटी) को सौंपने की तैयारी है। सामाजिक न्याय विभाग ने इसका संचालन कर रही संस्था सेवा भारती का अनुबंध समाप्त कर दिया है। अब विभाग पर्यटन विकास निगम के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। नई व्यवस्था में वृद्धाश्रम के कमरों का उपयोग बुजुर्गों के आवास के साथ व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भी किया जा सकेगा।
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, सबसे पहले बुजुर्गों को प्राथमिकता के आधार पर कमरे आवंटित किए जाएंगे। इसके बाद भी कमरे खाली रहते हैं तो उन्हें होटल की तर्ज पर किराये पर देने का विकल्प अपनाया जाएगा। विभाग का मानना है कि इससे भवन के खाली कमरों का बेहतर उपयोग हो सकेगा और उनसे होने वाली आय वृद्धाश्रम के रखरखाव तथा सुविधाओं को बेहतर बनाने में खर्च की जा सकेगी।
अनुबंध की शर्तें पूरी नहीं कर पा रही थी संस्था
सामाजिक न्याय विभाग की प्रमुख सचिव सोनाली पोंक्षे वायंगणकर के अनुसार, सेवा भारती निर्धारित शर्तों के मुताबिक पेड ओल्ड एज होम का संचालन नहीं कर पा रही थी। संस्था अनुबंध की कई शर्तें पूरी करने में विफल रही, जिसके चलते उसका अनुबंध समाप्त करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए संस्था को दो महीने का नोटिस भी दिया गया था।
विभाग के मुताबिक, बिजली बिलों के भुगतान में देरी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे थे। इसके अलावा एयर कंडीशनर खराब होने तथा निर्माण की गुणवत्ता संबंधी शिकायतें भी सामने आई थीं। बताया गया कि वृद्धाश्रम विभाग को सौंपे जाने के समय सभी एसी चालू हालत में थे। इसके बावजूद उनकी नियमित निगरानी और रखरखाव नहीं किया गया।
34 कमरों में 56 बुजुर्गों के रहने की व्यवस्था
लिंक रोड नंबर-3 स्थित पाटकर कॉलोनी में बने ‘संध्या छाया’ में कुल 34 कमरे हैं। इनमें सिंगल और डबल बेड की व्यवस्था के जरिए 56 बुजुर्गों के रहने की क्षमता है। यहां सिंगल बेड कमरे का मासिक किराया 45,990 से 49,990 रुपये, जबकि डबल बेड कमरे का किराया 76,980 से 86,980 रुपये निर्धारित किया गया है।
इतना अधिक किराया होने के बावजूद वृद्धाश्रम में बुजुर्गों की संख्या बेहद कम रही। रिपोर्ट के मुताबिक, यहां मुश्किल से आधा दर्जन बुजुर्ग ही रह रहे थे। कमरों के खाली रहने और उनके किराये के भुगतान को लेकर भी विभाग तथा सेवा भारती के बीच विवाद की स्थिति बनी रही।
दरअसल, सेवा भारती खाली कमरों का किराया देने के बजाय केवल आवंटित कमरों का किराया देने पर जोर दे रही थी। इसी मुद्दे सहित अनुबंध की अन्य शर्तों को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। अंततः विभाग ने संस्था से अनुबंध समाप्त कर दिया। अब पर्यटन विकास निगम के माध्यम से संचालन की नई व्यवस्था तैयार की जा रही है।


