तेल अवीव। इस्राइल के आम चुनाव में किसी भी राजनीतिक गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 27 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में उभरी है, लेकिन उसके नेतृत्व वाले गठबंधन को केवल 53 सीटें मिली हैं। वहीं, विपक्षी खेमे को 48 और अरब दलों को 19 सीटें मिली हैं। 120 सदस्यीय नेसेट (संसद) में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। ऐसे में नई सरकार का गठन राजनीतिक दलों के बीच होने वाली बातचीत और संभावित गठबंधनों पर निर्भर करेगा।
इस्राइल की केंद्रीय चुनाव समिति ने 29 अक्टूबर को मतगणना पूरी होने के बाद अंतिम सीटों का ब्योरा जारी किया। इसके अनुसार, 26वीं नेसेट का शपथ ग्रहण 10 नवंबर को होगा। हालांकि, चुनाव परिणामों की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद चार नवंबर को आधिकारिक नतीजे राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को सौंपे जाएंगे।
लिकुड सबसे बड़ी पार्टी, विपक्ष को भी बहुमत नहीं
‘द टाइम्स ऑफ इस्राइल’ की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू की लिकुड को 27 सीटें मिली हैं। गादी आइसेनकोट की याशर पार्टी 21 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। नफ्ताली बेनेट की बी’याचाद को 12 और जॉइंट लिस्ट को 11 सीटें मिलीं।
डेमोक्रेट्स और अरब समर्थित रा’अम पार्टी को आठ-आठ सीटें हासिल हुईं। इस्राइल बेतेनु, यूनाइटेड तोराह जुडाइज्म और ओत्ज्मा येहुदित को सात-सात, जबकि शस और रिलीजियस जियोनिज्म को छह-छह सीटें मिलीं।
सीटों के इस बंटवारे में नेतन्याहू समर्थक गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं। विपक्षी खेमे के पास 48 सीटें हैं। शेष 19 सीटें अरब दलों के पास हैं। चुनाव में 77.9 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो हाल के दशकों में सबसे अधिक मतदान प्रतिशतों में शामिल है।
अरब दलों की 19 सीटें बन सकती हैं निर्णायक
इस चुनाव में अरब दलों का प्रदर्शन महत्वपूर्ण रहा है। जॉइंट लिस्ट को 11 और रा’अम को आठ सीटें मिली हैं। दोनों दलों की कुल 19 सीटें सरकार गठन के समीकरण को बदल सकती हैं। विपक्ष यदि इनका समर्थन हासिल कर लेता है तो उसके पास बहुमत का आंकड़ा पार करने की संभावना बन सकती है।
हालांकि, अरब दलों के साथ सरकार बनाने या उन्हें बाहर से समर्थन देने के मुद्दे पर विपक्ष के भीतर एकराय नहीं है। रा’अम प्रमुख मंसूर अब्बास ने भी संकेत दिया है कि केवल अरब दलों के समर्थन के आधार पर अल्पमत सरकार बनाना आसान नहीं होगा। नेतन्याहू ने भी अरब दलों के समर्थन पर निर्भर सरकार का विरोध किया है।
राष्ट्रपति हर्जोग तय करेंगे किसे मिलेगा पहला मौका
चुनाव परिणामों के बाद अब राष्ट्रपति इसाक हर्जोग की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। आधिकारिक नतीजे मिलने के बाद वह संसद में प्रतिनिधित्व करने वाले सभी दलों के नेताओं से विचार-विमर्श करेंगे। इसके बाद उस सांसद को सरकार बनाने का पहला अवसर देंगे, जिसके पास बहुमत जुटाने की सबसे अधिक संभावना होगी।
इस्राइल की व्यवस्था के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा नामित नेता को सरकार बनाने के लिए 28 दिन मिलते हैं। जरूरत पड़ने पर 14 दिन का अतिरिक्त समय भी दिया जा सकता है। यदि वह असफल रहता है तो राष्ट्रपति किसी दूसरे सांसद को अवसर दे सकते हैं। निर्धारित प्रक्रिया के बाद भी सरकार नहीं बनती है तो नए चुनाव की नौबत आ सकती है।
गठबंधन के लिए दोनों खेमों को बदलना होगा रुख
नेतन्याहू के सामने चुनौती अपने मौजूदा सहयोगियों के साथ बहुमत का आंकड़ा हासिल करने की है। दूसरी ओर, आइसेनकोट के नेतृत्व वाले विपक्ष को भी अरब दलों के समर्थन और अन्य राजनीतिक विकल्पों पर सहमति बनानी होगी। एक साझा या राष्ट्रीय एकता सरकार का विकल्प भी राजनीतिक बातचीत में सामने आ सकता है, लेकिन नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के वादे के कारण विपक्षी दलों के लिए उनके साथ आना आसान नहीं होगा।
फिलहाल चुनाव परिणामों ने किसी एक नेता के लिए सरकार बनाने का रास्ता साफ नहीं किया है। अब राष्ट्रपति के साथ राजनीतिक दलों की बातचीत और गठबंधन के नए समीकरण तय करेंगे कि इस्राइल में अगली सरकार किसकी बनेगी।


