More
    Homeसंपादकीयराजनीति में शुचिता का ढोल, भाजयुमो विवादों ने खोली भाजपा की पोल!

    राजनीति में शुचिता का ढोल, भाजयुमो विवादों ने खोली भाजपा की पोल!

    Published on

    spot_img

    -महेश दीक्षित

    BJP Yuva Morcha Controversy: मध्यप्रदेश में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के 19 जिलों में अध्यक्षों और महामंत्रियों की नियुक्तियों के बाद जिस तरह विवादों का सिलसिला शुरू हुआ है, उसने भाजपा के चाल, चरित्र और चेहरे के दावों को कठघरे में खड़ा कर दिया है। 29 अक्टूबर को नियुक्तियों की घोषणा हुई और अगले एक-दो दिन में ही कई नवनियुक्त पदाधिकारी गंभीर आरोपों और विवादों से घिर गए। बालाघाट में जिलाध्यक्ष अमन गांधी की भाभी ने मारपीट और जान से मारने की धमकी की शिकायत दर्ज कराई, तो मंडला में जिलाध्यक्ष उत्कर्ष यादव की पत्नी ने थार गाड़ी की मांग को लेकर प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई।

    नर्मदापुरम में छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किए गए कुलदीप रघुवंशी को सीधे जिला अध्यक्ष की कुर्सी सौंप दी गई। उनका दावा है कि पुराने मामले में वह दोषमुक्त हो चुके हैं और पार्टी में वापसी भी हो गई थी। सिवनी में योगेश शिवहरे की नियुक्ति पर संगठन की पहले से तैयार सूची को दरकिनार करने के आरोप हैं। इंदौर ग्रामीण में लगातार तीसरी बार एक ही समाज को अध्यक्ष पद मिलने से सामाजिक प्रतिनिधित्व पर सवाल उठे हैं। सागर में नवनियुक्त जिलाध्यक्ष जसवंत राठौर की नियुक्ति के बाद उनके परिवार से जुड़े पुराने आयकर छापे भी चर्चा में हैं, हालांकि उनके खिलाफ इस मामले में कोई सीधी कार्रवाई नहीं हुई थी।

    सवाल यह है कि क्या भाजपा के पास संगठन की जिम्मेदारी सौंपने के लिए योग्य और निर्विवाद चेहरों का अकाल पड़ गया है? जिस पार्टी की राजनीति का आधार ही चाल, चरित्र और चेहरे की शुचिता का दावा रहा हो, उसके युवा संगठन में ऐसी नियुक्तियां आखिर किस कसौटी पर की गईं? क्या पद बांटते समय संगठनात्मक क्षमता, सामाजिक प्रतिष्ठा और सार्वजनिक आचरण को ताक पर रख दिया गया? युवा मोर्चा किसी राजनीतिक दल की भविष्य की पौधशाला होता है। यहां से निकले कार्यकर्ता ही कल पार्षद, विधायक और सांसद बनते हैं। यदि पौधशाला में ही चयन के मानदंड संदिग्ध होंगे, तो राजनीति का भविष्य कैसा होगा?

    यह संकट केवल भाजपा तक सीमित नहीं है। देश की राजनीति में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है। एडीआर और नेशनल इलेक्शन वॉच के आंकड़ों के मुताबिक, लोकसभा और राज्यसभा के कुल 776 सांसदों में से 326 (करीब 42 प्रतिशत) सांसदों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। इनमें 210 सांसदों के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले हैं। मौजूदा और पूर्व सांसदों-विधायकों से जुड़े 4,192 मामले अदालतों में लंबित हैं। 187 मौजूदा सांसदों और विधायकों ने महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े मामले घोषित किए हैं। यहां यह समझना जरूरी है कि एफआईआर दर्ज होना दोषी साबित होने के बराबर नहीं है। लेकिन राजनीतिक दल अपनी जिम्मेदारी से कतई नहीं बच सकते। अदालत का फैसला आने तक इंतजार करना और संगठन में पद बांटते समय नैतिकता की कसौटी से आंखें मूंद लेना दो अलग बातें हैं।

    लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने और सत्ता हासिल करने का नाम नहीं है। उसकी असली ताकत जनप्रतिनिधियों की विश्वसनीयता और राजनीतिक दलों की नैतिक प्रतिबद्धता में होती है। जब राजनीतिक दल ही दागदार छवि और विवादों से घिरे चेहरों को आगे बढ़ाने लगें, तब जनता किससे स्वच्छ राजनीति की उम्मीद करे? भाषणों में आदर्श, नारों में शुचिता और नियुक्तियों में समझौता-यह दोहरा चरित्र लोकतंत्र को भीतर से खोखला करता है। राजनीति को अपराध और अवसरवाद की छाया से निकालना है तो सबसे पहले राजनीतिक दलों को अपने घर में झांकना होगा। वरना चाल, चरित्र और चेहरे की दुहाई महज चुनावी जुमला बनकर रह जाएगी।

     

     

    Latest articles

    बैतूल में भाजपा के पूर्व विधायक चेतराम मानेकर का निधन, आमला से दो बार जीते थे चुनाव

    बैतूल। भाजपा के वरिष्ठ नेता और आमला विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक चेतराम मानेकर का...

    एमपी में एमएसएमई के लिए बनेगी अलग औद्योगिक विकास कंपनी, निजी पार्क बनाने पर मिलेगा 50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान

    भोपाल। मध्यप्रदेश में छोटे और मझोले उद्योगों को बढ़ावा देने और औद्योगिक जमीन की...

    आजम खां को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल भेजे गए

    जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने किया था...

    बॉक्स ऑफिस पर ‘जेलर 2’ का जलवा बरकरार, 800 करोड़ की ओर बढ़ी फिल्म

    मुंबई। सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म 'जेलर 2' बॉक्स ऑफिस पर लगातार शानदार प्रदर्शन कर...

    More like this

    बैतूल में भाजपा के पूर्व विधायक चेतराम मानेकर का निधन, आमला से दो बार जीते थे चुनाव

    बैतूल। भाजपा के वरिष्ठ नेता और आमला विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक चेतराम मानेकर का...

    एमपी में एमएसएमई के लिए बनेगी अलग औद्योगिक विकास कंपनी, निजी पार्क बनाने पर मिलेगा 50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान

    भोपाल। मध्यप्रदेश में छोटे और मझोले उद्योगों को बढ़ावा देने और औद्योगिक जमीन की...

    आजम खां को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, ईडी के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जेल भेजे गए

    जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी ने किया था...