भोपाल। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के पूर्व सहायक महाप्रबंधक (एजीएम) अनिल कुमार जैन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी लगभग 3.01 करोड़ रुपये की चल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई है। मामला आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और कथित रूप से अवैध धन को वैध दिखाने से जुड़ा है।
ईडी ने यह जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी), भोपाल द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। जांच में सामने आया कि अप्रैल 2017 से दिसंबर 2018 के बीच अनिल कुमार जैन ने अपनी ज्ञात वैध आय की तुलना में करीब 481 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की। एजेंसी के अनुसार, इतनी बड़ी संपत्ति के स्रोतों का संतोषजनक विवरण उपलब्ध नहीं कराया जा सका।
बैंक खातों में जमा हुए करोड़ों रुपये
जांच के दौरान ईडी को पता चला कि अनिल कुमार जैन और उनके परिवार के विभिन्न बैंक खातों में लगभग 2.35 करोड़ रुपये नकद जमा किए गए थे। इन राशियों को संपत्ति बिक्री से प्राप्त धनराशि बताया गया, लेकिन इसके समर्थन में कोई विश्वसनीय दस्तावेज या प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।
ईडी के अनुसार, बाद में इन नकद जमाओं को फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में परिवर्तित कर दिया गया। इसके अलावा करीब 66 लाख रुपये की एफडी भी ऐसी संपत्ति के रूप में चिन्हित की गई, जिसका वैध स्रोत स्पष्ट नहीं था।
हवाला नेटवर्क और फर्जी लेन-देन की आशंका
जांच एजेंसी का दावा है कि अनिल कुमार जैन ने कथित रूप से हवाला ऑपरेटरों और एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदद से अवैध धन को वैध आय के रूप में दर्शाने का प्रयास किया। इसके लिए निजी कंपनी एक्सीलेंट इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से संपत्ति बिक्री का कथित रूप से दिखावटी लेन-देन किया गया।
ईडी के मुताबिक, जांच में कंपनी की कोई वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि सामने नहीं आई। साथ ही, कंपनी के निदेशकों में शामिल अखिलेश चौधरी की भूमिका भी संदेह के घेरे में है, जिन्हें एजेंसी ने कथित तौर पर ‘डमी डायरेक्टर’ बताया है।
3 करोड़ रुपये की एफडी अटैच
ईडी ने कहा कि अपराध से अर्जित आय को सुरक्षित रखने और उसके संभावित हस्तांतरण या निपटान को रोकने के उद्देश्य से करीब 3.01 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट को अस्थायी रूप से अटैच किया गया है। एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि मामले में आगे भी जांच जारी रहेगी और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।


