मध्य प्रदेश कांग्रेस एक बार फिर अपने ही नेताओं के बयानों और अंतर्कलह को लेकर चर्चा में है। कांग्रेस की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (पीएसी) की बैठक में जिस तरह वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के उज्जैन में ट्रस्ट को एक रुपये में 500 एकड़ जमीन दिए जाने संबंधी बयान पर तीखी बहस हुई, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी के भीतर मतभेद अब केवल बंद कमरों तक सीमित नहीं रह गए हैं। जब प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और वरिष्ठ नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से अलग-अलग संदेश जाने लगें, तो इसका सीधा असर संगठन की विश्वसनीयता पर पड़ता है।
बैठक में विधायक आरिफ मसूद द्वारा यह सवाल उठाना कि दिग्विजय सिंह को ऐसा बयान देने की आवश्यकता क्यों पड़ी, और सज्जन सिंह वर्मा का “स्लीपर सेल” की पहचान कर कार्रवाई की बात कहना, इस बात का संकेत है कि कांग्रेस के भीतर अविश्वास की खाई गहरी होती जा रही है। पूर्व विधायक प्रवीण पाठक का यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि कार्यकर्ता आखिर किसकी बात को पार्टी की आधिकारिक लाइन मानें। जब नेतृत्व एकमत दिखाई नहीं देता, तो कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर होना स्वाभाविक है।
राजनीति में वैचारिक मतभेद असामान्य नहीं होते, लेकिन सार्वजनिक बयानबाजी और परस्पर विरोधी संदेश विपक्ष की भूमिका को कमजोर कर देते हैं। मध्य प्रदेश में कांग्रेस लंबे समय से सत्ता में वापसी का प्रयास कर रही है, लेकिन उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती भाजपा नहीं, बल्कि संगठनात्मक एकजुटता का अभाव बनता जा रहा है। यदि पार्टी के वरिष्ठ नेता सार्वजनिक मंचों पर अलग-अलग रुख अपनाते रहेंगे, तो जनता के बीच यह संदेश जाएगा कि कांग्रेस अभी भी अपने आंतरिक संकट से बाहर नहीं निकल पाई है।
हालांकि, किसी एक नेता को पार्टी की सभी समस्याओं का कारण ठहराना भी उचित नहीं होगा। कांग्रेस की चुनौती व्यक्तिगत नहीं, बल्कि संगठनात्मक है। नेतृत्व को स्पष्ट संवाद, अनुशासन और सामूहिक निर्णय की संस्कृति विकसित करनी होगी। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर यदि पार्टी जनता के मुद्दों पर एकजुट होकर संघर्ष करती है, तभी वह एक प्रभावी विपक्ष की भूमिका निभा सकेगी।
राजनीति में जनता केवल आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि स्थिर नेतृत्व और स्पष्ट दृष्टि देखना चाहती है। यदि कांग्रेस को मध्य प्रदेश में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस हासिल करनी है, तो उसे सबसे पहले अपने घर की कलह समाप्त करनी होगी। अन्यथा, सत्ता परिवर्तन का लक्ष्य केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रह जाएगा।
#MadhyaPradeshCongress #DigvijayaSingh #JituPatwari #MPPolitics #PoliticalEditorial


