नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। एयर इंडिया ने अपने चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर फ्यूल सरचार्ज (ईंधन अधिभार) में बड़ी कटौती का ऐलान किया है। इस फैसले के बाद यूरोप, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जाने वाले यात्रियों को टिकट बुकिंग पर सीधे तौर पर फायदा मिलेगा और लंबी दूरी की हवाई यात्रा पहले की तुलना में अधिक किफायती हो जाएगी।
एयर इंडिया के अनुसार, अप्रैल तक यूरोप जाने वाले यात्रियों से 205 अमेरिकी डॉलर का फ्यूल सरचार्ज लिया जा रहा था, जिसे अब घटाकर 125 डॉलर कर दिया गया है। वहीं, उत्तरी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के लिए यह शुल्क 280 डॉलर से घटाकर 200 डॉलर प्रति यात्री कर दिया गया है। यानी इन तीनों क्षेत्रों की यात्रा करने वाले यात्रियों को प्रति टिकट 80 डॉलर तक की बचत होगी।
क्या होता है फ्यूल सरचार्ज?
फ्यूल सरचार्ज वह अतिरिक्त शुल्क है, जिसे एयरलाइंस विमान ईंधन (एविएशन टरबाइन फ्यूल-ATF) की बढ़ती लागत की भरपाई के लिए टिकट के मूल किराए के अलावा यात्रियों से वसूलती हैं। यह टिकट की कुल कीमत का हिस्सा होता है, लेकिन कई बार इसे अलग से दर्शाया जाता है।
उदाहरण के तौर पर यदि किसी टिकट का बेस फेयर 4,000 रुपये है, तो उसमें फ्यूल सरचार्ज, एयरपोर्ट शुल्क और टैक्स जोड़ने के बाद कुल टिकट कीमत बढ़ जाती है।
एयरलाइंस फ्यूल सरचार्ज क्यों लगाती हैं?
विमानन कंपनियों के संचालन खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा ईंधन पर होता है। जब एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) महंगा होता है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है या डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर पड़ता है, तब एयरलाइंस अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए फ्यूल सरचार्ज वसूलती हैं।
क्या हर टिकट पर लगता है फ्यूल सरचार्ज?
हर एयरलाइन की नीति अलग होती है। कुछ कंपनियां इसे टिकट में अलग से दिखाती हैं, जबकि कुछ इसे बेस फेयर में ही शामिल कर देती हैं। प्रतिस्पर्धा या विशेष ऑफर के दौरान कई बार फ्यूल सरचार्ज कम या पूरी तरह समाप्त भी किया जा सकता है।
क्या सरकार तय करती है फ्यूल सरचार्ज?
फ्यूल सरचार्ज सरकार द्वारा लगाया गया टैक्स नहीं है। यह पूरी तरह एयरलाइन की व्यावसायिक नीति पर निर्भर करता है। हालांकि एयरलाइंस को पारदर्शिता और नियामकीय दिशानिर्देशों का पालन करना अनिवार्य होता है।


