दिग्विजय बोले-यह सुनियोजित खेल
भोपाल। मप्र राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कांग्रेस ने पूरे घटनाक्रम को लेकर भाजपा सरकार, निर्वाचन प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वहीं राज्यसभा की तीनों सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद उन्हें जीत का प्रमाण-पत्र भी सौंप दिया गया है।
एक ओर भाजपा इस जीत को अपनी राजनीतिक सफलता बताकर जश्न मना रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस लगातार हमलावर रुख अपनाए हुए है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने नामांकन निरस्त किए जाने को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए इसकी निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाए हैं।
दिग्विजय सिंह का आरोप- सब मिलीभगत का नतीजा
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने पर कहा कि उन्हें पहले से आशंका थी कि इस तरह की स्थिति पैदा की जाएगी। सिंह ने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में कई संस्थाओं की भूमिका संदिग्ध दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि जब सर्वोच्च न्यायालय को यह जानकारी थी कि याचिका पर समय रहते सुनवाई नहीं होने से मामला प्रभावित हो सकता है, तो तत्काल सुनवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को मिलीभगत का परिणाम बताते हुए कहा कि मीनाक्षी नटराजन जैसी गांधीवादी छवि की नेता को गलत तरीके से विवादों में घसीटा जा रहा है।
कमलनाथ ने संस्थाओं की निष्पक्षता पर उठाए प्रश्न
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी बयान में कहा कि भाजपा के तीनों राज्यसभा प्रत्याशियों को निर्वाचित होने का प्रमाण-पत्र सौंपना लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस द्वारा की गई शिकायत पर निर्वाचन आयोग का निर्णय अभी लंबित है और मामले में सर्वोच्च न्यायालय में अगले दिन सुनवाई निर्धारित है, तब इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम जनता की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास है। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र और प्रदेश की जनता के साथ धोखा करार दिया है।


