हरिद्वार कंपनी के नाम पर फर्जी स्टिकर से सप्लाई
भोपाल। राजधानी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में नशीली कफ सिरप के बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने भंडाफोड़ किया है। इस रैकेट का जाल भोपाल के साथ-साथ कई जिलों तक फैला हुआ था, जहां मेडिकल स्टोर्स के जरिए नशीली सिरप की सप्लाई की जा रही थी।
एसटीएफ ने गांधी नगर में डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक की कफ सिरप जब्त करने के बाद परबलिया थाना क्षेत्र के मुबारकपुर में एक और गुप्त गोदाम का खुलासा किया, जहां से करीब 50 लाख रुपये मूल्य की सिरप बरामद हुई। इस पूरे नेटवर्क का संचालन ग्रामीण क्षेत्रों और आसपास के जिलों तक फैला हुआ पाया गया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह के तीन मुख्य मास्टरमाइंड अभी फरार हैं, जिन पर 30-30 हजार रुपये (कुल 90 हजार रुपये) का इनाम घोषित किया गया है।
फर्जी पहचान और री-पैकिंग फैक्ट्री से चलता था पूरा नेटवर्क
एसटीएफ एसपी राजेश सिंह भदौरिया के अनुसार, यह गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। आरोपी फर्जी नामों का इस्तेमाल कर अपनी असली पहचान छुपाते थे। फरार आरोपियों में अर्जुन मालवीय (उर्फ राहुल कुशवाह), नितिन साहू (उर्फ निखिल कुशवाह) और सलमान (उर्फ बाबू भाई) शामिल हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह भोपाल के गांधी नगर में री-पैकिंग और री-सीलिंग यूनिट चला रहा था, जहां दवाओं को नए स्टीकर लगाकर बाजार में भेजा जाता था।
हरिद्वार की कंपनी के नाम पर फर्जी स्टीकर, कोडीन मिलाकर तैयार होती थी सिरप
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने खुलासा किया कि जब्त की गई कफ सिरप सामान्य सिरप की तुलना में कई गुना अधिक नशीली और खतरनाक है। इसे तैयार करने में कोडीन फॉस्फेट और अन्य प्रतिबंधित पदार्थों का अत्यधिक उपयोग किया गया था। गिरोह दवा की प्रामाणिकता दिखाने के लिए उत्तराखंड के हरिद्वार की एक प्रतिष्ठित कंपनी के नाम का फर्जी स्टीकर इस्तेमाल कर रहा था। शुरुआती लैब जांच में भी नशीले और प्रतिबंधित तत्वों की पुष्टि हुई है।
ग्रामीण इलाकों में फैला नेटवर्क, युवाओं को बनाया निशाना
यह पूरा सिंडिकेट भोपाल के साथ-साथ सीहोर, विदिशा और रायसेन जैसे जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय था। मेडिकल स्टोर्स के माध्यम से युवाओं, मजदूरों और छात्रों तक नशीली सिरप पहुंचाई जा रही थी। एसटीएफ अब यह जांच कर रही है कि इतनी बड़ी मात्रा में नशीला माल किस रास्ते से पहुंचा और इसमें स्थानीय स्तर पर कौन-कौन लोग शामिल थे। साथ ही दवा विभाग की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।


