नई दिल्ली। भारत ने वियतनाम को अपनी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ‘ब्रह्मोस’ देने का बड़ा रक्षा समझौता किया है। करीब 60 अरब रुपये के इस डील की पुष्टि पहली बार आधिकारिक स्तर पर की गई है। यह घोषणा रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला डायलॉग के दौरान की।
इस समझौते के साथ वियतनाम फिलीपींस और इंडोनेशिया के बाद भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला तीसरा देश बन गया है। हालांकि अब तक इस सौदे को औपचारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया गया था, लेकिन अब इसकी पुष्टि हो चुकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस समझौते के बाद एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है। चीन के साथ क्षेत्रीय तनाव के बीच वियतनाम की रक्षा क्षमता में यह सौदा महत्वपूर्ण बढ़ोतरी माना जा रहा है। भारत इससे पहले फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल दे चुका है, जबकि इंडोनेशिया के साथ भी इसी तरह का समझौता अंतिम चरण में बताया जा रहा है।
रक्षा सचिव ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्पष्ट किया कि भारत और वियतनाम के बीच ब्रह्मोस मिसाइल डील पहले ही साइन हो चुकी है। यह पहली बार है जब किसी शीर्ष भारतीय अधिकारी ने सार्वजनिक रूप से इस सौदे की पुष्टि की है। वियतनाम के साथ यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब दोनों देशों ने अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की मौजूदगी में 13 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए थे।
2030 तक 25 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य
भारत और वियतनाम ने 2030 तक आपसी व्यापार को 25 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। दोनों देशों के बीच हाल ही में उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी की घोषणा भी की गई थी, जिससे रक्षा और आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।


