वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सोमवार को बड़ा कानूनी झटका लगा, जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फेडरल रिजर्व की गवर्नर लीसा कुक को पद से हटाने की उनकी मांग खारिज कर दी। 5-4 के बहुमत से दिए गए फैसले में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि देश के केंद्रीय बैंक की स्वतंत्रता को बनाए रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था और आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रोकी ट्रंप की कार्रवाई?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने लीसा कुक को हटाने से पहले निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। अदालत के अनुसार, उचित प्रक्रिया के बिना किसी अधिकारी को हटाना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता और संबंधित व्यक्ति को अपने खिलाफ लगे आरोपों का जवाब देने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
1913 के बाद पहली बार उठा ऐसा मामला
यह मामला इसलिए भी ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि 1913 में फेडरल रिजर्व की स्थापना के बाद पहली बार किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने उसके किसी गवर्नर को पद से हटाने की कोशिश की। कोर्ट के फैसले ने केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता को बरकरार रखते हुए इस परंपरा को कायम रखा।
किन जजों ने दिया बहुमत का फैसला?
मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स और जस्टिस ब्रेट कैवनॉ सहित पांच जजों ने ट्रंप की मांग को खारिज करने के पक्ष में फैसला सुनाया। वहीं जस्टिस क्लेरेंस थॉमस, सैमुअल एलिटो, नील गोरसच और एमी कोनी बैरेट ने इस निर्णय से असहमति जताई।
चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स ने क्या कहा?
चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने लीसा कुक को हटाने से पहले आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि बिना उचित प्रक्रिया अपनाए किसी अधिकारी को आरोपों का जवाब देने का अवसर नहीं मिलता, जो न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
रॉबर्ट्स ने अपने निर्णय में फेडरल रिजर्व और अमेरिका के पूर्व केंद्रीय बैंकों के इतिहास का भी उल्लेख करते हुए कहा कि इन संस्थानों को शुरू से ही राजनीतिक हस्तक्षेप से दूर और स्वतंत्र रखा गया है, ताकि वे आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर निष्पक्ष निर्णय ले सकें।
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