ईरान ने अमेरिका के सामने रखा प्रस्ताव, सभी मोर्चों पर लड़ाई रोकने और तेल प्रतिबंधों में राहत की मांग
वॉशिंगटन/तेहरान। US Iran War:अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच तेहरान ने युद्ध समाप्त करने के लिए सात दिन का रोडमैप पेश किया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक प्रस्ताव में पहले सैन्य कार्रवाई रोकने और ईरान पर लगे आर्थिक दबाव को कम करने की बात है। इसके बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सात दिन के भीतर खोलने और परमाणु कार्यक्रम समेत अन्य मुद्दों पर नई बातचीत आगे बढ़ाने का प्रस्ताव है।
ईरान ने यह प्रस्ताव अमेरिका तक मध्यस्थ देशों के माध्यम से पहुंचाया है। रिपोर्टों के मुताबिक तेहरान चाहता है कि संघर्ष रोकने की प्रक्रिया एक साथ कई मोर्चों पर लागू हो और उसके बाद प्रतिबंधों तथा नाकाबंदी में राहत के बदले होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बहाल की जाए।
ईरान ने रखी चरणबद्ध बातचीत की शर्त
ईरानी प्रस्ताव का मुख्य जोर तत्काल सैन्य तनाव कम करने पर है। तेहरान का कहना है कि पहले हमले और सैन्य कार्रवाई रोकी जाए। इसके बाद प्रतिबंधों और बंदरगाहों से जुड़े प्रतिबंधों में राहत की दिशा में कदम उठाए जाएं। इसके बाद होर्मुज को फिर से खोलने और परमाणु मुद्दे सहित व्यापक समझौते पर बातचीत आगे बढ़ाई जा सकती है।
24 सितंबर को न्यूयॉर्क में अराघची ने सात दिन की योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि ईरान इसे लागू करने के लिए तैयार है, यदि अमेरिका भी प्रस्ताव पर सहमत होता है।
पजशकियान बोले- अब अमेरिका को फैसला करना है
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिका के साथ बातचीत और युद्ध समाप्त करने की संभावना पर ईरान का पक्ष रखा। ईरान का कहना है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन सैन्य दबाव के बीच बातचीत आगे बढ़ाना मुश्किल है।
ईरानी पक्ष के अनुसार जून में दोनों देशों के बीच एक समझ का आधार तैयार हुआ था। तेहरान का दावा है कि उस समय होर्मुज में आवाजाही और बातचीत दोनों चल रही थीं, लेकिन इसके बाद सैन्य संघर्ष फिर बढ़ गया। ईरान अब उसी प्रक्रिया को नए सिरे से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
ट्रम्प की चेतावनी के बीच आया प्रस्ताव
ईरान का सात दिन का प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव और कूटनीतिक गतिविधियां दोनों तेज हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान के साथ समझौते की संभावना का संकेत दिया है, जबकि अमेरिका की ओर से ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
वहीं ईरान का कहना है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और आर्थिक दबाव में कमी जरूरी है।
होर्मुज क्यों है सबसे अहम मुद्दा?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। मौजूदा संघर्ष के कारण यहां जहाजों की आवाजाही सामान्य स्तर से काफी नीचे बनी हुई है। 24 सितंबर को उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एक दिन में केवल 10 मालवाहक जहाज इस मार्ग से गुजरे, जबकि दस दिन का औसत करीब 17 जहाज प्रतिदिन था।
होर्मुज के खुलने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव कम हो सकता है। इसी वजह से ईरान और अमेरिका के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत में यह जलमार्ग प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। 24 सितंबर को तेल कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखा गया और होर्मुज को फिर से खोलने की बातचीत की खबरों का बाजार पर असर पड़ा।
फरवरी से जारी है अमेरिका-ईरान संघर्ष
अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई के बाद 28 फरवरी 2026 से ईरान के साथ संघर्ष शुरू हुआ। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। बाद में संघर्ष का असर खाड़ी क्षेत्र और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों तक भी पहुंचा।
अमेरिका का कहना है कि उसके सैन्य अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। दूसरी ओर ईरान लगातार अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता रहा है और परमाणु तकनीक के इस्तेमाल के अपने अधिकार पर जोर देता है।
आगे क्या होगा?
अब निगाह अमेरिका की प्रतिक्रिया पर है। ईरान के प्रस्ताव के अनुसार संघर्ष रोकने, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और होर्मुज खोलने की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है। रिपोर्टों के अनुसार दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थों के जरिए संपर्क जारी है, लेकिन प्रस्ताव के प्रमुख मुद्दों पर सहमति बनना अभी बाकी है।
यदि दोनों पक्ष प्रस्ताव के आधार पर आगे बढ़ते हैं तो होर्मुज की आवाजाही, तेल आपूर्ति और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत एक ही कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बन सकती है।


