नई दिल्ली। देश के युवाओं की कमाई का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब वे सिर्फ नौकरी और वेतन पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि शेयर बाजार में ट्रेडिंग, निवेश और कारोबार जैसे माध्यमों से भी आय अर्जित कर रहे हैं। कमाई के इन नए स्रोतों का असर आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने के तरीकों पर भी दिखाई देने लगा है। यही वजह है कि युवा अब सामान्य रिटर्न फॉर्म के बजाय कारोबार और निवेश से जुड़ी आय का विवरण देने वाले जटिल फॉर्म का इस्तेमाल अधिक कर रहे हैं।
25 साल से कम उम्र के 75% युवा भर रहे दूसरे ITR फॉर्म
टैक्स फाइलिंग प्लेटफॉर्म क्लियरटैक्स की सालाना रिपोर्ट ‘हाउ इंडिया फाइल्ड इन 2026’ के मुताबिक, आकलन वर्ष 2026-27 में 25 साल से कम उम्र के ऐसे 75 फीसदी युवाओं ने ITR-1 के बजाय दूसरे रिटर्न फॉर्म दाखिल किए, जिनकी आय के स्रोत वेतन के अलावा भी हैं। पिछले आकलन वर्ष में यह आंकड़ा 60 फीसदी था। यानी एक साल में 15 प्रतिशत अंक की वृद्धि दर्ज की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, खुद आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले 25 साल से कम उम्र के युवाओं में ITR-3 फॉर्म की हिस्सेदारी 2025-26 के 28 फीसदी से बढ़कर 2026-27 में 44 फीसदी हो गई। इसके उलट ITR-1 फॉर्म भरने वालों का अनुपात 41 फीसदी से घटकर 25 फीसदी रह गया। यह बदलाव युवाओं के बीच आय के विविध स्रोतों की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है।
निवेश से कमाई बताने वाले करदाताओं में 7.3 प्रतिशत अंक की वृद्धि
निवेश से होने वाला पूंजीगत लाभ भी आय का महत्वपूर्ण स्रोत बनकर उभरा है। क्लियरटैक्स के आंकड़ों के मुताबिक, आकलन वर्ष 2026-27 में खुद रिटर्न दाखिल करने वाले 41.7 फीसदी करदाताओं ने पूंजीगत लाभ की जानकारी दी। 2025-26 में यह अनुपात 34.4 फीसदी और 2024-25 में महज 25.5 फीसदी था। यानी एक साल में ऐसे करदाताओं की हिस्सेदारी 7.3 प्रतिशत अंक बढ़ी है।
बुजुर्ग भी रिटायरमेंट के बाद निवेश से कमा रहे पैसा
निवेश का रुझान सिर्फ युवाओं तक सीमित नहीं है। 60 वर्ष से अधिक उम्र के करीब 40 फीसदी करदाताओं ने भी 2026-27 में पूंजीगत लाभ की जानकारी दी। जबकि 40 से 50 वर्ष की उम्र के करदाताओं में यह अनुपात 35 फीसदी रहा। इससे स्पष्ट है कि रिटायरमेंट के बाद भी लोग निवेश और वित्तीय गतिविधियों में सक्रिय हैं।
जटिल ITR फॉर्म भरने वालों की हिस्सेदारी 57.2% पहुंची
आंकड़ों के मुताबिक, ITR-2 और ITR-3 फॉर्म दाखिल करने वाले करदाताओं की संयुक्त हिस्सेदारी 2024-25 में 36.2 फीसदी थी, जो 2025-26 में 48.1 फीसदी और 2026-27 में बढ़कर 57.2 फीसदी हो गई। वहीं, ITR-3 भरने वालों का अनुपात भी एक साल में 20.6 फीसदी से बढ़कर 28.4 फीसदी पहुंच गया। इन फॉर्म में आमतौर पर कारोबार, पेशे और निवेश से जुड़ी आय का विवरण देना होता है।
हालांकि, जटिल ITR फॉर्म भरने का अर्थ यह नहीं है कि करदाता ने नौकरी छोड़कर कारोबार शुरू कर दिया है। वेतनभोगी व्यक्ति नौकरी करते हुए भी शेयर बाजार, निवेश या अन्य माध्यमों से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकता है।
निवेश में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी
निवेश के क्षेत्र में महिलाएं भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं। आकलन वर्ष 2026-27 में 30.5 फीसदी महिला करदाताओं ने पूंजीगत लाभ की जानकारी दी, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 26.1 फीसदी था। इसी तरह ITR-2 दाखिल करने वाली महिलाओं की हिस्सेदारी भी 23.3 फीसदी से बढ़कर 26.8 फीसदी हो गई। ये आंकड़े बताते हैं कि देश में निवेश और वित्तीय गतिविधियों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।


