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    ट्रम्प की धमकी से भड़का ईरान, अमेरिका से वार्ता बीच में छोड़ी

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    हाथ मिलाने और संयुक्त फोटो से भी किया इनकार

    तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए स्विट्जरलैंड में चल रही शांति वार्ता एक बार फिर विवादों में घिर गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के धमकी भरे बयान के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बातचीत बीच में ही समाप्त कर दी और आगे की बैठक से भी इनकार कर दिया।

    ईरानी संसद अध्यक्ष और प्रमुख वार्ताकार मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने दावा किया कि करीब 80 मिनट तक चली बातचीत के दौरान उन्हें जानकारी मिली कि राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान के राष्ट्रपति, वार्ता टीम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर कड़े और धमकीपूर्ण बयान दिए हैं। इसके बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने बैठक छोड़ने का फैसला किया।

    गालिबाफ के अनुसार, बातचीत खत्म होने के बाद अमेरिकी पक्ष ने मध्यस्थों के जरिए एक और दौर की वार्ता का प्रस्ताव रखा, लेकिन ईरान ने इसे स्वीकार नहीं किया। इतना ही नहीं, ईरानी प्रतिनिधियों ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ हाथ मिलाने और संयुक्त फोटो सत्र में शामिल होने से भी इनकार कर दिया।

    दरअसल, वार्ता के दौरान ही ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ईरान को चेतावनी दी थी कि वह लेबनान में हिजबुल्ला की गतिविधियों को तुरंत रोके। ट्रम्प ने कहा था कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान पर और अधिक सख्त कार्रवाई करेगा। इसी बयान को ईरान ने वार्ता प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला कदम बताया।

    हालांकि तनाव के बीच कुछ सकारात्मक संकेत भी सामने आए हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया कि स्विट्जरलैंड में हुई वार्ता रचनात्मक रही और दोनों पक्ष 60 दिनों के भीतर व्यापक समझौते की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमत हुए हैं।

    इसी बीच ट्रम्प प्रशासन ने ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की बिक्री पर लगे कुछ प्रतिबंधों में 21 अगस्त तक अस्थायी ढील देने की घोषणा की है। अमेरिका का कहना है कि यह फैसला होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बनाए रखने को लेकर ईरान की सहमति के बाद लिया गया।

    वहीं, ईरान ने स्पष्ट किया है कि बातचीत जारी रहने के बावजूद उसकी सैन्य तैयारियों में कोई कमी नहीं की गई है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश की सुरक्षा और क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए सेना पूरी तरह सतर्क और तैयार है।

    इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक प्रयास स्थायी समाधान तक पहुंच पाएंगे या फिर राजनीतिक बयानबाजी दोनों देशों के रिश्तों में नई खाई पैदा करेगी।

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