कोलकाता। पश्चिम बंगाल सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में सोमवार को 35 नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल आर.एन. रवि ने लोकभवन में आयोजित समारोह में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी इस अवसर पर मौजूद रहे।
मंत्रिमंडल विस्तार में 13 नेताओं को कैबिनेट मंत्री, 3 को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा 19 को राज्य मंत्री बनाया गया। इसके साथ ही राज्य मंत्रिपरिषद में मंत्रियों की कुल संख्या बढ़कर 41 हो गई है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके साथ दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निशीथ प्रमाणिक, अशोक कीर्तनिया और क्षुदीराम टुडू ने भी मंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी। सोमवार का विस्तार नई सरकार का पहला बड़ा संगठनात्मक कदम माना जा रहा है।
संवैधानिक सीमा 44 मंत्रियों की, अभी 3 पद खाली
संविधान के 91वें संशोधन के तहत किसी राज्य में मंत्रियों की संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा के आधार पर राज्य में अधिकतम 44 मंत्री बनाए जा सकते हैं। वर्तमान विस्तार के बाद मंत्रियों की संख्या 41 हो गई है और अभी 3 पद रिक्त हैं।
मुख्यमंत्री ने गृह-वित्त अपने पास रखा
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने गृह और वित्त विभाग अपने पास रखे हैं। इसके अलावा अन्य महत्वपूर्ण विभागों का बंटवारा पहले ही किया जा चुका है।
किसको क्या जिम्मेदारी
-निशीथ प्रमाणिक को उत्तर बंगाल विकास, खेल एवं युवा कल्याण विभाग सौंपा गया।
-दिलीप घोष को ग्रामीण विकास, पशु संसाधन विकास और कृषि विपणन विभाग की जिम्मेदारी मिली।
-अग्निमित्रा पॉल को महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण और नगर निकाय विभाग दिए गए।
-अशोक कीर्तनिया को खाद्य एवं आपूर्ति तथा सहकारिता विभाग का प्रभार मिला।
-क्षुदीराम टुडू को जनजातीय विकास, पिछड़ा वर्ग कल्याण, अल्पसंख्यक मामले और मदरसा शिक्षा विभाग सौंपे गए।
राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश
शुभेंदु मंत्रिमंडल विस्तार को क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। भाजपा नेतृत्व ने विभिन्न क्षेत्रों और वर्गों के प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों का चयन किया है।


