विपक्ष के तेवरों के बीच हंगामेदार सत्र की तैयारी
नई दिल्ली । संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने की संभावना है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह सत्र करीब तीन सप्ताह तक चल सकता है। हालांकि, इसकी आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है और अंतिम निर्णय संसदीय मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीपीए) की बैठक में लिया जाएगा।
आमतौर पर संसद के मानसून और शीतकालीन सत्र चार सप्ताह तक चलते हैं और इनमें लगभग 20 बैठकें होती हैं। हालांकि, आवश्यकता के अनुसार पहले भी कम अवधि के सत्र बुलाए जाते रहे हैं। इस बार का मानसून सत्र राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हाल के विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों नए राजनीतिक समीकरणों के साथ सदन में आमने-सामने होंगे।
कई अहम मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी
सत्र के दौरान विपक्ष केंद्र सरकार को विभिन्न राष्ट्रीय और राजनीतिक मुद्दों पर घेरने की रणनीति बना रहा है। वहीं सरकार भी कई महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत प्रस्तावों को संसद में पेश करने की तैयारी में है। ऐसे में दोनों सदनों में तीखी बहस और हंगामे की संभावना जताई जा रही है।
तृणमूल और शिवसेना (यूबीटी) का मुद्दा भी गरमा सकता है
आगामी सत्र में तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) में हुए राजनीतिक घटनाक्रम भी चर्चा का विषय बन सकते हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष तृणमूल कांग्रेस के 20 और शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों को अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग लंबित है। इस मामले में उनके फैसले पर सभी दलों की नजर बनी हुई है।
राज्यसभा में एनडीए की स्थिति और मजबूत
उधर, राज्यसभा में हाल ही में नवनिर्वाचित और पुनर्निर्वाचित सांसदों के शपथ ग्रहण के बाद सत्तारूढ़ एनडीए की स्थिति पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है। इससे सरकार को महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में पहले की अपेक्षा अधिक सहूलियत मिलने की संभावना है।
महत्वपूर्ण रहेगा मानसून सत्र
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी मानसून सत्र केवल विधायी कार्यवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक नीतियों, राज्यों से जुड़े मुद्दों और विपक्ष के राजनीतिक हमलों को लेकर भी जोरदार बहस देखने को मिल सकती है। ऐसे में यह सत्र वर्ष 2026 के सबसे महत्वपूर्ण संसदीय सत्रों में से एक माना जा रहा है।
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