नई दिल्ली। देश में आम जनता की जेब पर महंगाई का दबाव बढऩे वाला है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने अपनी ताजा रिपोर्ट में चेतावनी दी है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी आने वाले महीनों में रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों को बढ़ा सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, 15 मई के बाद से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगभग 7.5 रुपए प्रति लीटर की वृद्धि हो चुकी है। वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊँची बनी हुई हैं, और अगर यही रुख जारी रहा तो कीमतें 10 रुपए प्रति लीटर तक पहुंच सकती हैं।
ईंधन की कीमतों में यह बढ़ोतरी खुदरा महंगाई दर को 0.48 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है। भारत में माल ढुलाई का करीब 71 प्रतिशत हिस्सा सडक़ मार्ग पर निर्भर है, और ट्रक व मालवाहक वाहनों की लागत का 42 प्रतिशत ईंधन पर खर्च होता है। इसका असर दूध, ताजे फल, दालें, मसाले, अंडे, मांस, मछली, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, सीमेंट और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों पर सीधे दिखाई देगा।
कीमत बढ़ाएं या पैकेट घटाएं
कंपनियां लागत बढऩे की स्थिति में या तो सीधे उत्पाद के दाम बढ़ाएँगी या पैकेट में उत्पाद की मात्रा कम करेंगी। हालांकि, सितंबर 2025 में हुई जीएसटी कटौती कुछ राहत जरूर दे रही है, लेकिन यह भारी ऊर्जा लागत को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं है।
कच्चे तेल की कीमतें बजट अनुमान से ऊपर
क्रिसिल के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों में कच्चे तेल की औसत कीमत 112 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि सरकार और आरबीआई ने 95 डॉलर प्रति बैरल का अनुमान लगाया था।
आरबीआई और मानसून पर नजर
हालांकि वर्तमान मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के लक्ष्य के नीचे है, लेकिन ईंधन कीमतों, कमजोर मानसून और अल नीनो जैसी स्थितियों के कारण आगे बढऩे का अनुमान है। आरबीआई इन सभी कारकों पर कड़ी नजर रखे हुए है, क्योंकि खराब मानसून खाद्य महंगाई को और बढ़ा सकता है।


