दिल्ली से बस में सवार होकर पहुंचे दो तस्कर गिरफ्तार, बैग और पैंट में छिपाकर लाए थे एम्फेटामाइन
भोपाल। राजधानी भोपाल का अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (ISBT) मादक पदार्थों की तस्करी का नया ठिकाना बनता नजर आ रहा है। लंबी दूरी की बसों से सामान्य यात्रियों की तरह सफर कर रहे तस्कर बेखौफ होकर ड्रग्स की खेप भोपाल पहुंचा रहे हैं। रविवार को राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) की टीम ने आईएसबीटी पर कार्रवाई करते हुए दिल्ली से आए दो यात्रियों को 4.321 किलोग्राम एमडी (एम्फेटामाइन) के साथ गिरफ्तार किया। खास बात यह है कि एक महीने के भीतर आईएसबीटी पर मादक पदार्थों की तस्करी का यह तीसरा बड़ा मामला है। इससे पहले 14 और 20 अक्टूबर को भी इसी बस टर्मिनल से भारी मात्रा में ड्रग्स जब्त की गई थी।
बैग और पैंट में छिपाकर लाए थे ड्रग्स
डीआरआई अधिकारियों को खुफिया सूचना मिली थी कि दिल्ली से बस के जरिए दो व्यक्ति मादक पदार्थों की खेप लेकर भोपाल पहुंचने वाले हैं। इसके बाद टीम ने आईएसबीटी पर निगरानी बढ़ा दी। बस के पहुंचते ही संदिग्ध यात्रियों की पहचान कर उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
तलाशी के दौरान एक आरोपी के बैग से आठ प्लास्टिक पैकेट मिले। इनमें 4071 ग्राम सफेद क्रिस्टल जैसा पदार्थ भरा हुआ था। वहीं, दूसरे आरोपी ने 250-250 ग्राम के दो पैकेट काले पाउच में रखकर अपनी पैंट के भीतर छिपा रखे थे। दोनों के कब्जे से कुल 4.321 किलोग्राम संदिग्ध मादक पदार्थ बरामद हुआ। फील्ड टेस्ट किट से जांच करने पर सभी पैकेटों में एम्फेटामाइन की पुष्टि हुई। डीआरआई ने दोनों आरोपियों को एनडीपीएस एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया है।
सामान्य यात्रियों की आड़ में तस्करी
जांच एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचने के लिए तस्कर अब बसों को सुरक्षित जरिया बना रहे हैं। वे सामान्य यात्रियों की तरह टिकट लेकर लंबी दूरी की बसों में सफर करते हैं और सामान के बीच या शरीर पर मादक पदार्थ छिपाकर ले जाते हैं। बसों में यात्रियों की लगातार आवाजाही का फायदा उठाकर तस्कर अपनी पहचान छिपाने और खेप को गंतव्य तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं।
दिल्ली से भोपाल तक किसके लिए पहुंच रही ड्रग्स?
लगातार सामने आ रहे मामलों ने जांच एजेंसियों के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि दिल्ली से भोपाल लाई जा रही ड्रग्स की खेप आखिर किसे पहुंचाई जानी थी और शहर में इसका नेटवर्क कितना बड़ा है? गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर सप्लायर, स्थानीय खरीदार और तस्करी के नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि 14 अक्टूबर, 20 अक्टूबर और रविवार को पकड़ी गई खेप के पीछे एक ही गिरोह सक्रिय है या अलग-अलग तस्कर गिरोह भोपाल को अपना ठिकाना बना रहे हैं।


