भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (MP TET) 2026 के आयोजन की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने परीक्षा की समय-सारणी तय कर दी है। परीक्षा 13 या 20 दिसंबर को आयोजित किए जाने की संभावना है। हालांकि, अंतिम तारीख की आधिकारिक घोषणा होना अभी बाकी है। विभाग अगले दो-तीन दिनों में अभ्यर्थियों के लिए परीक्षा से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकता है।
परीक्षा आयोजित कराने की जिम्मेदारी माध्यमिक शिक्षा मंडल को सौंपी गई है। मंडल ने परीक्षा की व्यवस्थाओं को लेकर तैयारियां पूरी कर ली हैं। परीक्षा केंद्र जिला स्तर पर बनाए जाएंगे, ताकि अभ्यर्थियों को अपने जिले में ही परीक्षा देने की सुविधा मिल सके।
34 हजार शिक्षकों ने कराया पंजीयन
माध्यमिक शिक्षा मंडल फिलहाल 16 से 27 नवंबर के बीच डीएड परीक्षा आयोजित कर रहा है। इसके बाद दिसंबर में टीईटी परीक्षा कराई जाएगी। अब तक करीब 34 हजार शिक्षक परीक्षा में शामिल होने के लिए पंजीयन करा चुके हैं। इनमें सरकारी स्कूलों में कार्यरत लगभग 20 हजार और निजी स्कूलों के 14 हजार शिक्षक शामिल हैं।
इधर, स्कूल शिक्षा विभाग ने परीक्षा की तैयारी के लिए मॉडल प्रश्नपत्र भी तैयार कर लिए हैं। इन्हें विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया गया है, ताकि अभ्यर्थी परीक्षा के प्रारूप और प्रश्नों की प्रकृति को समझकर अपनी तैयारी कर सकें।
पुरानी नियुक्तियों वाले शिक्षकों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार
टीईटी में शामिल होने वाले शिक्षकों की वास्तविक संख्या को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। खासतौर पर वर्ष 2005 से 2009 के बीच नियुक्त हुए शिक्षकों की अनिवार्यता का मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
इन शिक्षकों ने उस समय कर्मचारी चयन मंडल (पूर्व में व्यापम) के माध्यम से आयोजित भर्ती परीक्षा पास कर नियुक्ति हासिल की थी। हालांकि, उस दौर की भर्ती परीक्षा और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के निर्धारित मानकों में अंतर का मुद्दा सामने आया है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा विभाग ने सर्वोच्च न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया है।
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ही स्पष्ट होगा कि इन शिक्षकों को भी टीईटी देना अनिवार्य होगा या उन्हें छूट मिलेगी। यदि अदालत से छूट मिलती है तो परीक्षा के दायरे में आने वाले अभ्यर्थियों की संख्या घटकर करीब 70 हजार रह सकती है। इनमें वे शिक्षक शामिल हैं, जिनकी नियुक्ति वर्ष 1998 से 2005 के बीच सीधी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से हुई थी।


