भोपाल। मध्यप्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में पट्टे पर मकान या भूखंड लेकर रहने वाले लोगों को अब पक्की रजिस्ट्री कराने के लिए अपनी जेब से स्टाम्प शुल्क नहीं देना होगा। मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के तहत राज्य सरकार पात्र हितग्राहियों के पट्टों की रजिस्ट्री का पूरा खर्च स्वयं उठाएगी। इस अभियान को गति देने के लिए छह नवंबर को धनतेरस के अवसर पर प्रदेशभर में विशेष पहल की जाएगी। मंत्री, सांसद और विधायक गांवों में पहुंचकर अपनी मौजूदगी में पात्र हितग्राहियों की रजिस्ट्री कराएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में योजना की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान चलाकर प्रदेश के सभी पात्र हितग्राहियों को जल्द से जल्द संपत्ति की पक्की रजिस्ट्री उपलब्ध कराई जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मकान या भूखंड का पट्टा होने के बावजूद पक्की रजिस्ट्री नहीं होने से लोगों को संपत्ति के मालिकाना अधिकारों का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। रजिस्ट्री होने के बाद हितग्राही को संपत्ति पर कानूनी मालिकाना हक मिलेगा। इसके साथ ही वे नियमानुसार संपत्ति का क्रय-विक्रय कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर उसके आधार पर बैंक से ऋण भी ले सकेंगे।
धनतेरस पर गांव-गांव पहुंचेंगे जनप्रतिनिधि
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी मंत्री, सांसद और विधायक छह नवंबर को अपने पैतृक गांव अथवा अपनी पसंद के किसी अन्य गांव में पहुंचें। वहां मुख्यमंत्री रजिस्ट्री योजना के तहत शत-प्रतिशत पात्र हितग्राहियों की रजिस्ट्री कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। जिला कलेक्टर प्रभारी मंत्री, स्थानीय मंत्री और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय कर अभियान की तैयारियां पूरी करेंगे। जिन गांवों में सभी पात्र लोगों की रजिस्ट्री पूरी हो जाएगी, वहां जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में छोटा कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा।
15 नवंबर तक 20 लाख रजिस्ट्री का लक्ष्य
बैठक में प्रमुख सचिव राजस्व डॉ. ई. रमेश कुमार ने बताया कि एक नवंबर 2026 तक प्रदेश में 12 लाख 87 हजार 252 रजिस्ट्री का पंजीयन पूरा हो चुका है। सरकार ने 15 नवंबर तक इस आंकड़े को बढ़ाकर 20 लाख तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए योजना का प्रचार-प्रसार और जनजागरूकता अभियान तेज किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पक्की रजिस्ट्री मिलने से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। संपत्ति का कानूनी स्वामित्व मिलने से वे बैंक ऋण सहित अन्य वित्तीय सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और अगले वर्ष इसे ‘युवा वर्ष’ से भी जोड़ा जाएगा।


