भोपाल। झील की लहरों के बीच शब्दों ने जब भावनाओं का रूप लिया तो कहीं प्रेम की कोमल अनुभूति उभरी तो कहीं विरह की कसक ने मन को छुआ। किसी कविता में जिंदगी का दर्शन था तो किसी गजल में रिश्तों की उदासी और अधूरेपन का अहसास। राजधानी के सैर सपाटा का प्राकृतिक परिवेश रविवार सुबह साहित्य और संवेदनाओं के रंगों से सराबोर हो गया। अवसर था छतनारा समूह की 81वीं पोएट्स वॉक का, जिसमें शहर के 25 से अधिक कवियों और कविता प्रेमियों ने अपनी रचनाओं के जरिए भावनाओं का संसार रचा।
पोएट्स वॉक की शुरुआत वन विहार के चीकू द्वार के बाहर कवियों के एकत्र होने से हुई। सभी ने साथ सैर की। इस दौरान विश्व कविता और अनुवाद की प्रक्रिया जैसे विषयों पर साहित्यिक संवाद भी चलता रहा। इसके बाद सैर सपाटा के पास झील किनारे काव्य गोष्ठी सजी और कविता-पाठ का सिलसिला शुरू हुआ।
युवा शायर मनन दीक्षित ने कार्यक्रम का संचालन किया। उन्होंने सभी का स्वागत करते हुए पोएट्स वॉक की परिकल्पना से परिचित कराया। शायर अभय शुक्ला की दो गजलों के पाठ के साथ आयोजन का औपचारिक शुभारंभ हुआ।
कविताओं में उभरी मन की अनकही पीड़ा
कवि सुहास मिश्रा ने अपनी कविता में आत्मानुभूति, विरह और भीतर के द्वंद्व को शब्द दिए। उनकी पंक्तियां थीं—
तुमने अपनी कस्तूरी से, मुझ मृग को तो बड़ा छकाया; तुम कहते, ‘कस्तूरी तेरी, भीतर नजरें करनी पड़तीं।’
भीतर की बेचैनी को व्यक्त करती उनकी पंक्ति-
सबकी अपनी विरह-वेदना और स्वयं ही सहनी पड़ती।
ने श्रोताओं को भावुक किया।
शायर अमित गांगले ने प्रेम और मानवीय सीमाओं को अपनी गजल में कुछ यूं अभिव्यक्त किया-
इश्क से और सवालात नहीं कर सकते, छोटा मुंह और बड़ी बात नहीं कर सकते।
उनकी गजल को श्रोताओं की खूब सराहना मिली। वहीं प्रख्यात शायर निवेश साहू ने जिंदगी की विडंबनाओं, दुखों और अधूरे हिसाब को अपनी गजल में पिरोया। उनकी पंक्तियां थीं-
सर पर अजीब धूप सी तारी है इन दिनों, बार-ए-शिकस्त और भी भारी है इन दिनों।
इसी गजल की एक और पंक्ति-
बाजार-ए-गम में अपनी उधारी है इन दिनों…
ने जीवन के अनकहे अनुभवों को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा।
हास्य, प्रेम और सामाजिक संवेदनाओं के रंग
काव्य गोष्ठी में भाग्यश्री और सुहास मिश्रा ने हिंदी कविताओं का पाठ किया। देवेंद्र जेठवानी की हास्य रचनाओं ने श्रोताओं को खूब हंसाया। अनुपम ने प्रेम के विभिन्न आयामों को नज्मों के माध्यम से प्रस्तुत किया, जबकि असद की नज्मों को भी सराहना मिली। कुमार राजन ने निशांत की कविता ‘अजन्मी बेटी के नाम’ का पाठ कर सामाजिक संवेदनाओं को स्वर दिया। कार्यक्रम के संचालक मनन दीक्षित ने भी अपनी गजलें सुनाईं।
इस आयोजन में स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थियों से लेकर वरिष्ठ नागरिक और सेवानिवृत्त सदस्य तक शामिल हुए। खास बात यह रही कि कविता के प्रति अनुराग रखने वाले लोग अब सपरिवार भी इस पहल से जुड़ रहे हैं।
कविता के बहाने बढ़ता साहित्यिक परिवार
कार्यक्रम के समापन पर छतनारा समूह की निर्देशिका मोहिनी शर्मा ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पोएट्स वॉक अब एक निरंतर बढ़ता हुआ परिवार बन गई है। इसमें वरिष्ठ नागरिकों के साथ-साथ युवा और परिवार सहित कविता प्रेमी भी जुड़ रहे हैं। उन्होंने शहरवासियों से छतनारा की निशुल्क लाइब्रेरी में आकर साहित्य पढ़ने और इस साहित्यिक पहल का हिस्सा बनने का आग्रह किया।


