More
    Homeदेशसुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने वाले LLB छात्र प्रबल प्रताप समेत दो...

    सुप्रीम कोर्ट में हंगामा करने वाले LLB छात्र प्रबल प्रताप समेत दो गिरफ्तार, सुनवाई के दौरान की थी अभद्रता

    Published on

    spot_img

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट परिसर में सुनवाई के दौरान हंगामा करने और न्यायालय की कार्यवाही में बाधा डालने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने प्रबल प्रताप सिंह और चंद्रभान नामक दो कानून के छात्रों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपी लखनऊ विश्वविद्यालय के एलएलबी छात्र हैं।

    दिल्ली पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 132, 221, 224 और 3(5) के तहत तिलक मार्ग थाने में एफआईआर दर्ज की है। कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा कर्मियों की शिकायत के आधार पर की गई।

    सुनवाई के दौरान किया था हंगामा

    पुलिस के अनुसार, यह घटना 10 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट नंबर-13 में हुई, जहां एसएलपी संख्या 31367/2026 (प्रबल प्रताप एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) की सुनवाई चल रही थी।

    याचिकाकर्ता के रूप में स्वयं अपनी पैरवी कर रहे प्रबल प्रताप सिंह पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर अदालत की कार्यवाही में बाधा डाली, अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और कोर्ट रूम में कागजात फेंक दिए, जिससे सुनवाई प्रभावित हुई।

    सुरक्षा कर्मियों से धक्का-मुक्की का आरोप

    दिल्ली पुलिस का कहना है कि जब सुप्रीम कोर्ट के सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें शांत कराने और अदालत की गरिमा बनाए रखने का प्रयास किया, तब प्रबल प्रताप सिंह ने कथित तौर पर उनके साथ धक्का-मुक्की की और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई।

    क्या है पूरा मामला?

    10 जुलाई को जस्टिस के. वी. विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ प्रबल प्रताप सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश को चुनौती देने से संबंधित था।

    सुनवाई के दौरान प्रबल प्रताप ने अदालत में ऊंची आवाज में बोलना शुरू कर दिया और न्यायाधीशों को “ज्यूडिशियल सर्वेंट” कहकर संबोधित किया। उन्होंने खुद को “संप्रभु” बताते हुए न्यायालय को आदेश देने की बात कही। इसके बाद उन्होंने कोर्ट रूम में दस्तावेज फेंक दिए, जिससे अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    स्थिति बिगड़ने पर सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें कोर्ट रूम से बाहर ले जाने की कोशिश की। इसी दौरान उन्होंने कथित तौर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के खिलाफ भी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।

    सीजेआई ने क्या कहा था?

    घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा था कि कभी-कभी युवा भावनाओं में ऐसा व्यवहार कर बैठते हैं, लेकिन सभी नागरिकों का दायित्व है कि वे संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और सम्मान बनाए रखें। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का सम्मान लोकतंत्र की मजबूती के लिए अत्यंत आवश्यक है।

    Latest articles

    मन, शरीर और आत्मा के लिए क्यों जरूरी है मेडिटेशन?

    आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और मानसिक अशांति तेजी से बढ़...

    दतिया उपचुनाव 2026: आशुतोष तिवारी-घनश्याम सिंह के बीच कांटे की टक्कर

    भोपाल। मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव इस बार बेहद दिलचस्प...

    NEET प्रदर्शन केस: FIR वापस लेने की तैयारी, 2500 संदिग्धों पर दिल्ली पुलिस की नजर

    साजिश की जांच जारी, CCTV, मोबाइल डेटा और फेस रिकग्निशन से जुटाए जा रहे सबूत नई...

    आज अस्पताल से डिस्चार्ज होंगे सोनम वांगचुक, फिर लौटेंगे लद्दाख

    नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सोमवार को गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल से छुट्टी...

    More like this

    मन, शरीर और आत्मा के लिए क्यों जरूरी है मेडिटेशन?

    आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और मानसिक अशांति तेजी से बढ़...

    दतिया उपचुनाव 2026: आशुतोष तिवारी-घनश्याम सिंह के बीच कांटे की टक्कर

    भोपाल। मध्यप्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव इस बार बेहद दिलचस्प...

    NEET प्रदर्शन केस: FIR वापस लेने की तैयारी, 2500 संदिग्धों पर दिल्ली पुलिस की नजर

    साजिश की जांच जारी, CCTV, मोबाइल डेटा और फेस रिकग्निशन से जुटाए जा रहे सबूत नई...