नई दिल्ली। कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हिस्सा लेने जा रहे भारत के शीर्ष 400 मीटर धावकों का मानना है कि ग्लासगो में पदक जीतना इस वर्ष होने वाले एशियन गेम्स की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण होगा। खिलाड़ियों का कहना है कि कॉमनवेल्थ गेम्स में मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा उन्हें एशियन गेम्स से पहले अपनी तैयारी परखने का बेहतरीन अवसर देगी।
23 जुलाई से शुरू होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत 32 सदस्यीय एथलेटिक्स टीम उतारेगा। इसके करीब दो महीने बाद एशियन गेम्स का आयोजन होगा, जिसे भारतीय एथलीट इस साल का प्रमुख लक्ष्य मान रहे हैं।
ग्लासगो में मिलेगी विश्वस्तरीय चुनौती
पुरुष 400 मीटर और मिश्रित 4×400 मीटर रिले के धावक विशाल थेन्नारासु कयालविझी ने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और अन्य मजबूत देशों के खिलाड़ियों के खिलाफ प्रतिस्पर्धा करना आसान नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि हर बड़ा टूर्नामेंट चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन अच्छी तैयारी के साथ पदक जीतना संभव है। उनके अनुसार ग्लासगो में मुकाबले उन्हें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेंगे।
पर्सनल बेस्ट प्रदर्शन पर रहेगा फोकस
22 वर्षीय विशाल फिलहाल सरकार द्वारा प्रायोजित 45 दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर के लिए पोलैंड के स्पाला रवाना हुए हैं। 60 सदस्यीय भारतीय दल में 41 खिलाड़ी और 19 कोच एवं सपोर्ट स्टाफ शामिल हैं।
विशाल का कहना है कि ग्लासगो में उनका पहला लक्ष्य व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ (Personal Best) समय हासिल करना होगा।
उनकी प्रमुख उपलब्धियां—
- फेडरेशन कप (रांची) में 400 मीटर दौड़ 44.98 सेकेंड में पूरी कर राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया।
- वर्ल्ड रिले (बोत्सवाना) में पुरुष 4×400 मीटर रिले में 3:00.32 मिनट का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय दर्ज किया।
- मिश्रित 4×400 मीटर रिले में उनका सर्वश्रेष्ठ समय 3:14.81 मिनट है।
जय कुमार बोले- कॉमनवेल्थ गेम्स ज्यादा कठिन
भारतीय धावक जय कुमार ने भी माना कि कॉमनवेल्थ गेम्स में प्रतिस्पर्धा एशियन गेम्स से कहीं अधिक कठिन होगी। हालांकि उन्होंने कहा कि इस साल उनका मुख्य लक्ष्य एशियन गेम्स में बेहतर प्रदर्शन करना है।
जय कुमार ने बताया कि इंटर-स्टेट चैंपियनशिप और फेडरेशन कप में अच्छे प्रदर्शन के बाद अब वे भी पोलैंड में प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा लेंगे। वहां से लौटने के बाद अपनी तैयारियों का अंतिम आकलन करेंगे।
उन्होंने कहा कि 400 मीटर स्पर्धा में कॉमनवेल्थ गेम्स के विजेता आमतौर पर 43 से 45 सेकेंड के बीच दौड़ पूरी करते हैं, जबकि एशियन गेम्स में हाल के वर्षों में विजेता समय 45 सेकेंड से अधिक रहा है। यही वजह है कि कॉमनवेल्थ गेम्स अधिक चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
एशियन गेम्स की तैयारी का अहम मंच
भारतीय धावकों का मानना है कि ग्लासगो में मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा उनकी कमजोरियों को पहचानने और प्रदर्शन में सुधार करने का अवसर देगी। ऐसे में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 केवल पदक जीतने का मंच नहीं, बल्कि एशियन गेम्स की तैयारी का सबसे बड़ा टेस्ट भी साबित होगा।


