बेरूत। लेबनान में इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक नया प्रस्ताव पश्चिम एशिया की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। ट्रंप का सुझाव है कि हिजबुल्ला के खिलाफ कार्रवाई इस्राइली सेना के बजाय सीरिया को करनी चाहिए। हालांकि, सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने इस प्रस्ताव में कोई रुचि नहीं दिखाई और कहा कि ट्रंप के बयान की गलत व्याख्या की जा रही है।
ट्रंप ने क्यों दिया सीरिया को जिम्मेदारी का सुझाव?
ट्रंप का मानना है कि सीरिया की मौजूदा सरकार, जिसने पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन के बाद सत्ता संभाली है, हिजबुल्ला के खिलाफ अधिक प्रभावी कार्रवाई कर सकती है। उनका तर्क है कि इससे लेबनान में बड़े पैमाने पर होने वाले सैन्य हमलों और नागरिकों की मौतों को कम किया जा सकता है।
हालांकि, व्हाइट हाउस की ओर से अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस प्रस्ताव पर अमेरिका की आधिकारिक नीति क्या होगी।
इस्राइल और लेबनान में बढ़ी चिंता
ट्रंप के इस बयान के बाद इस्राइल और लेबनान दोनों में राजनीतिक और सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। इस्राइल पहले से ही सीरिया की नई सरकार को संदेह की नजर से देखता है और दक्षिणी सीरिया के कुछ हिस्सों में उसकी सैन्य मौजूदगी बनी हुई है।
दूसरी ओर, लेबनान में भी सीरियाई हस्तक्षेप की आशंका को लेकर चिंता जताई जा रही है। देश के लोगों को 2005 तक चले सीरिया के सैन्य प्रभाव की यादें अब भी परेशान करती हैं।
जी-7 सम्मेलन में ट्रंप ने उठाया था मुद्दा
जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने कहा था कि लेबनान में जारी युद्ध बहुत लंबा खिंच गया है और इसमें बड़ी संख्या में आम नागरिकों की जान जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी हिजबुल्ला लड़ाके को निशाना बनाने के लिए हर बार पूरी इमारत गिराने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।
सीरिया ने संघर्ष से दूरी बनाई
सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शरा ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार का प्राथमिक लक्ष्य देश का पुनर्निर्माण है। उन्होंने कहा कि सीरिया किसी पुराने विवाद को दोबारा नहीं खोलना चाहता और न ही किसी नए क्षेत्रीय संघर्ष का हिस्सा बनने की इच्छा रखता है।
गृहयुद्ध के दौरान हिजबुल्ला और ईरान ने बशर अल-असद का समर्थन किया था, जबकि वर्तमान नेतृत्व उस समय असद विरोधी गुट का हिस्सा था। इसके बावजूद नई सरकार क्षेत्रीय टकराव से बचने की नीति अपना रही है।
नेतन्याहू ने क्या कहा?
इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका की मध्यस्थता से हुए लेबनान समझौते को ईरान और हिजबुल्ला के लिए बड़ा झटका बताया है। उन्होंने कहा कि इस्राइल तब तक अपनी सुरक्षा नीति में कोई ढील नहीं देगा, जब तक हिजबुल्ला का खतरा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता।
नेतन्याहू ने यह भी स्पष्ट किया कि समझौते के तहत इस्राइल लेबनान के भीतर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा।
क्षेत्रीय तनाव पर बनी रहेगी नजर
ट्रंप के प्रस्ताव, सीरिया के रुख और इस्राइल की सुरक्षा रणनीति के बीच पश्चिम एशिया की स्थिति फिलहाल बेहद संवेदनशील बनी हुई है। आने वाले दिनों में अमेरिका, इस्राइल, सीरिया और लेबनान के रुख पर पूरे क्षेत्र की नजर रहेगी।


