भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने प्रस्तावित प्रावधानों पर गंभीर आपत्ति जताई है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष हाजी मोहम्मद हारून ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ संविधान द्वारा संरक्षित है और उसमें किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यूसीसी लागू करने के नाम पर धार्मिक कानूनों में बदलाव का प्रयास किया गया तो इसका कानूनी विरोध किया जाएगा।
हाजी हारून ने कहा कि देश में अधिकांश सिविल कानून पहले से लागू हैं, जबकि मुस्लिम पर्सनल लॉ कुरान और हदीस पर आधारित है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि समान नागरिक संहिता लागू करनी है तो पूरे देश के लिए एक समान कानून संसद के माध्यम से बनाया जाना चाहिए, न कि अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग प्रावधानों के साथ।
लिव-इन रिलेशनशिप पर जताई आपत्ति
यूसीसी के तहत लिव-इन रिलेशनशिप को कानूनी मान्यता देने की चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए हाजी हारून ने कहा कि विवाह और परिवार भारतीय समाज की मजबूत नींव हैं। उनका मानना है कि बिना विवाह के संबंधों को बढ़ावा देना सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि शादी और निकाह जैसे पवित्र रिश्तों को मजबूत किया जाना चाहिए, न कि उनके विकल्पों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
मुस्लिम महिलाओं के समर्थन संबंधी दावों पर सवाल
राज्य सरकार को मिले सुझावों में बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं द्वारा यूसीसी का समर्थन किए जाने के दावों पर भी उन्होंने सवाल उठाए। हाजी हारून ने कहा कि इन आंकड़ों का आधार स्पष्ट किया जाना चाहिए। उनका दावा है कि हाल में आयोजित बैठकों और चर्चाओं में बड़ी संख्या में लोगों ने यूसीसी तथा लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े प्रावधानों का विरोध दर्ज कराया है।
नीति निर्देशक तत्वों का किया उल्लेख
जमीयत अध्यक्ष ने कहा कि संविधान के नीति निर्देशक तत्वों में केवल समान नागरिक संहिता ही नहीं, बल्कि शराबबंदी, समान वेतन और संसाधनों के समान वितरण जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार इन सिद्धांतों को लागू करना चाहती है तो सभी बिंदुओं पर समान गंभीरता से काम होना चाहिए।
गाय संरक्षण पर भी रखी राय
हाजी हारून ने कहा कि यदि देश में गाय संरक्षण को लेकर व्यापक जनभावनाएं हैं तो केंद्र सरकार को पूरे देश के लिए एक समान और स्पष्ट कानून बनाना चाहिए। उन्होंने गौवंश की बिक्री और निर्यात को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर सख्त नीति बनाने की आवश्यकता बताई।
अदालत जाने के संकेत
उन्होंने कहा कि फिलहाल यूसीसी को लेकर प्रक्रिया शुरुआती चरण में है, लेकिन यदि मुस्लिम पर्सनल लॉ में हस्तक्षेप किया गया तो संगठन कानूनी विकल्पों पर विचार करेगा। जरूरत पड़ने पर अदालत का दरवाजा खटखटाने से भी पीछे नहीं हटेगा।


