मध्य पूर्व में फिर बढ़ा तनाव; लेबनान, ईरान और इजराइल के बीच शांति प्रयासों पर मंडराया संकट
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त कराना वॉशिंगटन की जिम्मेदारी है। यदि किसी भी शांति समझौते का उल्लंघन होता है, तो इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार माना जाएगा। यह बयान ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar से हुई बातचीत के दौरान दिया।
दूसरी ओर, इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम लागू होने की खबरों के कुछ घंटों बाद हिजबुल्लाह प्रमुख Naim Qassem ने कहा कि संगठन किसी भी कीमत पर इजराइली कब्जे को स्वीकार नहीं करेगा। बेरूत में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हिजबुल्लाह अपने क्षेत्रों को मुक्त कराने के लक्ष्य पर कायम है और यदि उस पर हमला किया गया तो जवाब भी हथियारों से ही दिया जाएगा।
पिछले 24 घंटे के 5 बड़े घटनाक्रम
1. अमेरिका-ईरान वार्ता टली
स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित अमेरिका-ईरान की पहली औपचारिक वार्ता फिलहाल स्थगित कर दी गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, लेबनान में जारी इजराइली सैन्य कार्रवाई को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
2. लेबनान में इजराइली हमलों में 47 की मौत
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, दक्षिणी लेबनान और बेका घाटी में हुए ताजा इजराइली हवाई हमलों में 47 लोगों की मौत हुई, जबकि 97 लोग घायल हुए हैं।
3. होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ी जहाजों की आवाजाही
अमेरिका-ईरान समझौते की संभावनाओं के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कारोबारी जहाजों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार को कुछ राहत मिली है।
4. ट्रम्प का बड़ा बयान
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि अमेरिका किसी दबाव में बातचीत नहीं कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि ईरान खुद वार्ता के लिए आगे आया है और अगले 60 दिनों तक उसे अमेरिका से कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलेगी।
5. पाकिस्तान-सऊदी अरब के बीच चर्चा
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने सऊदी क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman से बातचीत कर क्षेत्रीय शांति और कूटनीतिक समाधान की आवश्यकता पर जोर दिया।
मध्य पूर्व में शांति की राह अब भी कठिन
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान, इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच बढ़ते बयानबाजी युद्ध ने क्षेत्रीय स्थिरता को फिर चुनौती दी है। हालांकि कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन जमीनी हालात अब भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय शक्तियों की भूमिका मध्य पूर्व की शांति के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।


