वॉशिंगटन डीसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने स्वीकार किया है कि ईरान के साथ युद्ध उनकी रिपब्लिकन पार्टी की मिडटर्म चुनाव में हार की एक बड़ी वजह बना। हालांकि, उन्होंने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई जरूरी थी। ट्रम्प ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि उन्हें दोबारा फैसला लेने का मौका मिला तो वे फिर ईरान पर हमला करेंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध के कारण कुछ समय के लिए पेट्रोल की कीमतें बढ़ गई थीं। इसके बावजूद उन्हें अपने फैसले पर कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर दोबारा ऐसा फैसला लेने का अवसर मिला तो वे फिर यही कदम उठाएंगे। ट्रम्प के इस बयान को चुनाव में पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद भी अपनी ईरान नीति पर कायम रहने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
दोनों सदनों में रिपब्लिकन को बड़ा झटका
मिडटर्म चुनाव के नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका दिया है। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर चुनाव हुए। अब तक घोषित नतीजों में डेमोक्रेट्स को 242 और ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी को 151 सीटें मिली हैं। 42 सीटों पर मतगणना जारी है। सदन में बहुमत के लिए 218 सीटों की जरूरत होती है।
सीनेट की 100 सीटों में से इस बार 35 पर चुनाव हुए। अब तक 33 सीटों के नतीजे घोषित किए गए हैं। इनमें डेमोक्रेटिक पार्टी ने 20 और रिपब्लिकन पार्टी ने 13 सीटें जीती हैं। चुनाव के बाद सीनेट में डेमोक्रेट्स की कुल सदस्य संख्या 54 और रिपब्लिकन की 44 हो गई है। दो सीटों पर मतगणना जारी है। सीनेट में बहुमत के लिए 51 सदस्यों का समर्थन जरूरी है।
गवर्नर चुनाव में भी डेमोक्रेट्स का प्रदर्शन बेहतर
अमेरिका के 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए चुनाव हुए थे। इनमें से 34 राज्यों के नतीजे घोषित हो चुके हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी ने 22 राज्यों में जीत दर्ज की है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी को 12 राज्यों में सफलता मिली है। दो राज्यों में मतगणना जारी है। इस तरह संसद के दोनों सदनों के साथ गवर्नर चुनाव में भी डेमोक्रेट्स का प्रदर्शन बेहतर रहा है।
हार के बाद रिपब्लिकन नेताओं में आरोप-प्रत्यारोप
चुनावी नतीजों के बाद रिपब्लिकन पार्टी के भीतर हार की वजहों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पार्टी के नेता एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मतदाताओं में ईरान युद्ध को लेकर ट्रम्प के फैसले के प्रति नाराजगी थी। अब पार्टी के कुछ करीबी नेता भी इस सैन्य कार्रवाई से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी सोशल मीडिया पर ईरान युद्ध को हार की वजह बताया। उन्होंने लिखा कि आगे क्या करना है, इस पर कोई भी चर्चा इसी बात से शुरू होनी चाहिए कि पार्टी को युद्ध के कारण नुकसान उठाना पड़ा है। वेंस का यह बयान पार्टी के भीतर ईरान नीति को लेकर उभरते मतभेदों का संकेत माना जा रहा है।
डेमोक्रेट्स 34 साल पुराना रिकॉर्ड दोहराने की ओर
हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेटिक पार्टी की सीटों की संख्या 258 तक पहुंचने का अनुमान है। यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो पार्टी 1992 के बाद पहली बार इतनी सीटें हासिल करेगी। वर्ष 1992 के चुनाव में डेमोक्रेट्स ने 258 सीटें जीती थीं। इसके बाद 2008 में पार्टी को 257 सीटें मिली थीं। इन दोनों चुनावों के बाद बिल क्लिंटन और बराक ओबामा क्रमश: 1993 और 2009 में राष्ट्रपति बने थे।
ट्रम्प ने चुनाव प्रचार में खुद को बताया था चेहरा, अब हार से बनाई दूरी
चुनाव प्रचार के दौरान ट्रम्प लगातार रिपब्लिकन पार्टी के अभियान का नेतृत्व करते नजर आए थे। उन्होंने मतदाताओं से कई बार अपने नाम पर वोट देने की अपील की थी। बताया गया कि उन्होंने 47 बार लोगों से उन्हें उम्मीदवार मानकर मतदान करने को कहा था। लेकिन चुनाव परिणाम प्रतिकूल आने के बाद ट्रम्प ने हार की जिम्मेदारी से दूरी बना ली।
उन्होंने कहा कि वे खुद चुनाव में उम्मीदवार नहीं थे। उनके मुताबिक, इसी वजह से रिपब्लिकन पार्टी के समर्थकों ने बड़ी संख्या में मतदान नहीं किया। चुनाव प्रचार के दौरान अपनी लोकप्रियता को पार्टी की जीत का आधार बताने वाले ट्रम्प का नतीजों के बाद यह रुख राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।


