तेहरान/नई दिल्ली। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अंतिम संस्कार कार्यक्रम 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई तक चलेंगे, जिनमें ईरान के तीन प्रमुख शहरों—तेहरान, कुम और मशहद—में आयोजन किए जाएंगे। अनुमान है कि इस दौरान करीब 2 करोड़ लोग जनाजे में शामिल हो सकते हैं।
ईरानी प्रशासन ने कई देशों को इस समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रण भेजा है, जिनमें भारत भी शामिल है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रित किए जाने की चर्चा है, हालांकि भारत सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
तेहरान से मशहद तक अंतिम यात्रा
जानकारी के अनुसार, खामेनेई का पार्थिव शरीर पहले तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद इसे धार्मिक शहर कुम ले जाया जाएगा और फिर मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में अंतिम संस्कार किया जाएगा, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
मशहद को शिया इस्लाम का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र माना जाता है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु इमाम रजा की दरगाह पर दर्शन करने पहुंचते हैं।
भारत की भागीदारी पर सस्पेंस
ईरान ने अंतिम संस्कार समारोह के लिए कई मित्र देशों को आमंत्रित किया है। भारत की ओर से प्रतिनिधित्व को लेकर फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है। इससे पहले मई 2024 में ईरान के पूर्व राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी के अंतिम संस्कार में भारत ने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा था।
ऐतिहासिक स्तर पर हो सकता है बड़ा जनाजा
ईरानी अधिकारियों का अनुमान है कि यह अंतिम संस्कार दुनिया के सबसे बड़े जनाजों में से एक हो सकता है। इससे पहले 1989 में ईरान के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के जनाजे में करीब 1 करोड़ लोग शामिल हुए थे, जिसमें भारी भीड़ और भगदड़ की घटनाएं भी हुई थीं।
सुरक्षा और प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती
अधिकारियों ने बताया कि युद्ध और मौजूदा हालात को देखते हुए यह आयोजन बेहद संवेदनशील होगा। भारी भीड़ को नियंत्रित करना और सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
इस पूरे कार्यक्रम की जिम्मेदारी ईरान की स्थानीय प्रशासनिक इकाइयों और संबंधित धार्मिक संगठनों को सौंपी गई है।


