More
    Homeधर्म-अध्यात्मभगवान श्रीकृष्ण के अनुसार भक्तों की 4 श्रेणियां, जानिए किसे माना गया...

    भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार भक्तों की 4 श्रेणियां, जानिए किसे माना गया है सबसे श्रेष्ठ

    Published on

    spot_img

    अध्यात्म डेस्क। सनातन धर्म में भक्ति को ईश्वर तक पहुंचने का सबसे सरल मार्ग माना गया है। भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास रखने वाले व्यक्ति को भक्त कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं भक्तों को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया है? इसका उल्लेख भगवद्गीता में मिलता है, जहां श्रीकृष्ण अर्जुन को भक्ति के विभिन्न स्वरूपों के बारे में बताते हैं।

    गीता में वर्णित है भक्तों का वर्गीकरण

    भगवान श्रीकृष्ण ने भगवद्गीता में कहा है-

    चतुर्विधा भजन्ते मां जना: सुकृतिनोऽर्जुन।
    आर्तो जिज्ञासुरर्थार्थी ज्ञानी च भरतर्षभ।।

    अर्थात, हे अर्जुन! चार प्रकार के पुण्यात्मा लोग मेरी भक्ति करते हैं- आर्त, जिज्ञासु, अर्थार्थी और ज्ञानी।

    1. अर्थार्थी भक्त

    अर्थार्थी वह भक्त होता है जो धन, वैभव, सुख-सुविधा या किसी भौतिक लाभ की प्राप्ति के लिए भगवान का स्मरण करता है। उसकी भक्ति का केंद्र ईश्वर नहीं, बल्कि सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति होती है। इसी कारण भगवान श्रीकृष्ण ने इसे भक्तों में सबसे निम्न श्रेणी का बताया है।

    2. आर्त भक्त

    आर्त भक्त वह है जो किसी संकट, बीमारी, दुख या परेशानी के समय भगवान को पुकारता है। जब जीवन में कठिन परिस्थितियां आती हैं, तब वह ईश्वर की शरण लेता है। ऐसे भक्त अर्थार्थी से श्रेष्ठ माने गए हैं क्योंकि उनका भाव दुख से मुक्ति पाने का होता है।

    3. जिज्ञासु भक्त

    जिज्ञासु भक्त वह है जिसमें ईश्वर, आत्मा और जीवन के रहस्यों को जानने की इच्छा होती है। वह सत्य की खोज में भक्ति का मार्ग अपनाता है। संसार की नश्वरता को समझकर जो व्यक्ति परम सत्य को जानना चाहता है, वह जिज्ञासु भक्त कहलाता है।

    4. ज्ञानी भक्त

    भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार ज्ञानी भक्त सबसे श्रेष्ठ होता है। वह किसी लाभ, इच्छा या भय के कारण नहीं, बल्कि निस्वार्थ भाव से ईश्वर की भक्ति करता है। उसके लिए भगवान ही जीवन का अंतिम लक्ष्य होते हैं। वह हर परिस्थिति में परमात्मा का चिंतन करता है और स्वयं को ईश्वर के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित कर देता है।

    क्यों श्रेष्ठ हैं ज्ञानी भक्त?

    श्रीकृष्ण कहते हैं कि जो भक्त अनन्य भाव से उनका स्मरण और भजन करते हैं, उनके योगक्षेम का भार स्वयं भगवान उठाते हैं। ज्ञानी भक्त की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह ईश्वर के अलावा किसी अन्य वस्तु या सुख की कामना नहीं करता। इसी कारण उसे भगवान ने अपनी आत्मा के समान बताया है।

    आप किस श्रेणी में आते हैं?

    भक्ति का स्वरूप व्यक्ति की भावना और उद्देश्य पर निर्भर करता है। यदि भक्ति केवल इच्छाओं की पूर्ति के लिए है तो वह अर्थार्थी है, यदि दुख में याद आती है तो आर्त, यदि सत्य की खोज के लिए है तो जिज्ञासु और यदि निस्वार्थ समर्पण है तो वह ज्ञानी भक्ति कहलाती है। भगवान श्रीकृष्ण के अनुसार यही ज्ञानी भक्त भक्ति का सर्वोच्च आदर्श है।

    Latest articles

    भोपाल शिव मंदिर विवाद: पूर्व CS की बहू अंजली उर्फ उजमा रजा के खिलाफ शिकायत

    भोपाल। राजधानी भोपाल के चूना भट्टी स्थित आम्रपाली एन्क्लेव सोसायटी में नवनिर्मित शिव मंदिर...

    इंदौर नगर निगम : 103.42 करोड़ का फर्जी बिल घोटाला, 32 आरोपियों के खिलाफ 20 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल

    इंदौर। इंदौर नगर निगम के चर्चित 103.42 करोड़ रुपए फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन...

    Gold Price Today: सोना 2,440 रुपये और चांदी 5,300रुपये  उछली

    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले मजबूत संकेतों का असर सोमवार को घरेलू सर्राफा...

    Nigeria Attack: कडुना में बंदूकधारियों का हमला, 30 लोगों की मौत

    अबूजा। नाइजीरिया के उत्तर-पश्चिमी राज्य कडुना में एक बार फिर हिंसा ने भयावह रूप...

    More like this

    भोपाल शिव मंदिर विवाद: पूर्व CS की बहू अंजली उर्फ उजमा रजा के खिलाफ शिकायत

    भोपाल। राजधानी भोपाल के चूना भट्टी स्थित आम्रपाली एन्क्लेव सोसायटी में नवनिर्मित शिव मंदिर...

    इंदौर नगर निगम : 103.42 करोड़ का फर्जी बिल घोटाला, 32 आरोपियों के खिलाफ 20 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल

    इंदौर। इंदौर नगर निगम के चर्चित 103.42 करोड़ रुपए फर्जी बिल घोटाले में प्रवर्तन...

    Gold Price Today: सोना 2,440 रुपये और चांदी 5,300रुपये  उछली

    नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले मजबूत संकेतों का असर सोमवार को घरेलू सर्राफा...