बच्चों के दिमाग पर गंभीर खतरे की चेतावनी
नई दिल्ली। भूजल पर बढ़ती निर्भरता अब दुनिया के करोड़ों लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है। स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिकों के एक नए अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि दुनिया भर में 18 से 22 करोड़ लोग ऐसा भूजल पी रहे हैं, जिसमें मैंगनीज (Manganese) की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा से अधिक है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, सबसे अधिक खतरा दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के घनी आबादी वाले नदी डेल्टा क्षेत्रों में है, जहां बड़ी आबादी आज भी बिना किसी उपचार के सीधे भूजल का उपयोग करती है। अध्ययन में कहा गया है कि लंबे समय तक अधिक मैंगनीज युक्त पानी पीने से विशेष रूप से बच्चों और शिशुओं के मस्तिष्क तथा तंत्रिका तंत्र के विकास पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
WHO ने क्यों घटाई मैंगनीज की सुरक्षित सीमा?
मैंगनीज मानव शरीर के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है और सामान्यतः इसकी जरूरत भोजन से पूरी हो जाती है। लेकिन पीने के पानी में इसकी अधिक मात्रा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है।
इसी वजह से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने वर्ष 2021 में पीने के पानी में मैंगनीज की अनुशंसित सीमा 400 माइक्रोग्राम प्रति लीटर से घटाकर 80 माइक्रोग्राम प्रति लीटर कर दी थी। लंबे समय तक अधिक मात्रा में मैंगनीज का सेवन तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकता है और बच्चों के मानसिक विकास पर नकारात्मक असर डाल सकता है।
यह अध्ययन प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका नेचर वाटर (Nature Water) में प्रकाशित हुआ है।
भारत समेत इन क्षेत्रों में सबसे अधिक खतरा
अध्ययन के अनुसार, निम्नलिखित क्षेत्र मैंगनीज युक्त भूजल के लिहाज से सबसे अधिक संवेदनशील हैं-
-भारत और बांग्लादेश का गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा
-वियतनाम का मेकांग डेल्टा
-हनोई के आसपास का रेड रिवर डेल्टा
-पाकिस्तान के कुछ क्षेत्र
-अमेरिका में मिसिसिपी नदी के आसपास के कुछ इलाके
वैज्ञानिकों के मुताबिक, इन क्षेत्रों की नई तलछटी मिट्टी में स्वाभाविक रूप से मैंगनीज अधिक मात्रा में मौजूद रहता है। जब भूमिगत जलभृतों (Aquifers) में ऑक्सीजन की कमी होती है, तो सूक्ष्मजीव मैंगनीज को घुलनशील रूप में बदल देते हैं, जिससे यह भूजल में मिल जाता है और पीने के पानी को प्रदूषित कर देता है।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि जिन क्षेत्रों में भूजल ही पेयजल का मुख्य स्रोत है, वहां नियमित रूप से पानी की गुणवत्ता की जांच करानी चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर जल शोधन (Water Treatment) और वैकल्पिक सुरक्षित पेयजल स्रोतों का उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम किया जा सके।


