नई दिल्ली। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी (SY Quraishi) की आगामी पुस्तक ‘India and I: A Hundred Memories, Not a Memoir’ के एक अंश को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। किताब में दावा किया गया है कि वर्ष 2012 में चुनाव आयोग को लेकर कुछ केंद्रीय मंत्रियों की टिप्पणियों की शिकायत मिलने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने भावुक प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, “अगर आपको ऐसा लगता है, तो मैं आत्महत्या कर लूंगा।”
किताब के अनुसार, यह प्रतिक्रिया उस समय आई जब कुरैशी ने चुनाव आयोग के प्रति कुछ मंत्रियों के रवैये पर अपनी नाराजगी प्रधानमंत्री तक पहुंचाई थी। यह दावा पुस्तक में लेखक के व्यक्तिगत संस्मरण के रूप में दर्ज है।
मनमोहन सिंह ने चुनाव आयोग को बताया लोकतंत्र की आत्मा
कुरैशी के अनुसार, मुलाकात के दौरान डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा था कि चुनाव आयोग केवल भारत का गौरव नहीं, बल्कि लोकतंत्र की आत्मा है। उन्होंने कहा कि यदि देश इस संस्था की गरिमा खो देता है, तो लोकतंत्र की बुनियाद भी कमजोर हो जाएगी।
लेखक ने पुस्तक में मनमोहन सिंह को ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत किया है, जिनके लिए संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि गहरी आस्था का विषय था।
क्या था पूरा मामला?
पुस्तक के अनुसार, 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने मुस्लिम आरक्षण बढ़ाने का चुनावी वादा किया था। भाजपा की शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने इसे आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए खुर्शीद को नोटिस जारी किया था।
इसके बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने चुनाव आयोग की आलोचना की। कुरैशी ने इस पर अपनी नाराजगी तत्कालीन प्रधानमंत्री के प्रेस सचिव हरीश खरे के माध्यम से प्रधानमंत्री तक पहुंचाई।
अगले दिन प्रधानमंत्री कार्यालय से उन्हें मिलने के लिए बुलाया गया। पुस्तक में दावा किया गया है कि मुलाकात के दौरान डॉ. मनमोहन सिंह इस बात से बेहद आहत थे कि चुनाव आयोग को लेकर उनकी नीयत पर किसी तरह का संदेह जताया गया।
‘यह कोई रहस्य नहीं, उनके व्यक्तित्व की झलक थी’
कुरैशी ने किताब में लिखा है कि इस बातचीत की जानकारी उन्होंने तत्कालीन प्रधान सचिव टी.के.ए. नायर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन और अन्य करीबी अधिकारियों से भी साझा की थी। उनके अनुसार, इसे कभी गोपनीय घटना नहीं माना गया, बल्कि यह देश का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति के संवेदनशील और ईमानदार व्यक्तित्व की झलक थी।
किताब में और क्या खास?
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी की यह पुस्तक ‘India and I: A Hundred Memories, Not a Memoir’ उनके प्रशासनिक जीवन से जुड़े 100 संस्मरणों का संग्रह है। पुस्तक में चुनाव सुधार, मतदाता जागरूकता अभियान, चुनावी खर्च की निगरानी, पंजाब के ड्रग्स संकट, चुनाव प्रबंधन और कई राष्ट्रीय घटनाओं का उल्लेख किया गया है।
यह पुस्तक जल्द ही प्रकाशन के लिए बाजार में उपलब्ध होगी।


