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    राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस में बड़ा अपडेट: एफआईआर दर्ज, 8 नामजद आरोपी गिरफ्तार; जांच में बड़े नामों पर भी उठे सवाल

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    अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे और दानपात्रों से जुड़ी कथित चोरी के मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। करीब 18 दिनों की जांच के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आखिरकार एफआईआर दर्ज कराई है। इस मामले में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय के ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत कुल 8 लोगों को नामजद किया गया है।

    एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों—टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा—को गिरफ्तार कर लिया है। बाकी पांच आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है। मामले को लेकर सुरक्षा व्यवस्था और ट्रस्ट की आंतरिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

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    कैसे सामने आया मामला

    यह पूरा मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था, जब मंदिर परिसर में चढ़ावे और दानपात्रों से जुड़ी अनियमितताओं की शिकायत मिली। इसके बाद ट्रस्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार से जांच की मांग की। 13 जून को राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया, जिसने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू की।

    एसआईटी ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।

    एफआईआर में शामिल 8 आरोपी

    एफआईआर में जिन लोगों के नाम शामिल हैं, वे इस प्रकार हैं-रामशंकर यादव (टिन्नू), लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और करुणेश पांडेय।

    इनमें से कुछ आरोपी मंदिर परिसर से जुड़े कर्मचारी और सेवादार बताए जा रहे हैं।

    जांच में सामने आए गंभीर संकेत

    सूत्रों के अनुसार एसआईटी जांच में कई अहम बातें सामने आई हैं। जांच के दौरान दानपात्रों की चाबियां कथित रूप से टिन्नू यादव के पास मिलने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा जांच टीम ने लगभग 150 ऐसे सेवादारों और कर्मचारियों को चिन्हित किया है, जिनकी आर्थिक स्थिति 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अचानक बदल गई थी।

    हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इसमें कितनी संपत्ति अवैध रूप से अर्जित की गई या किस स्तर पर गड़बड़ी हुई।

    बड़े नामों को लेकर उठे सवाल

    सूत्रों के मुताबिक एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण प्रभारी गोपाल राव समेत 17 लोगों के नाम जांच के दायरे में बताए गए थे। लेकिन एफआईआर में इन वरिष्ठ पदाधिकारियों का नाम शामिल नहीं है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है।

    विपक्ष का कहना है कि जांच को पूरी तरह निष्पक्ष होना चाहिए और किसी भी बड़े नाम को बचाया नहीं जाना चाहिए, जबकि ट्रस्ट की ओर से अभी इस पर आधिकारिक स्पष्टीकरण सीमित है।

    राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज

    मामले पर भाजपा नेता विवेक ठाकुर ने कहा है कि एसआईटी जांच जारी है और जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

    वहीं आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने सवाल उठाते हुए कहा कि जिन बड़े नामों पर आरोप हैं, उनका उल्लेख एफआईआर में क्यों नहीं है। उन्होंने पूरी जांच प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग की।

    समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए मुख्यमंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद मंदिर परिसर में चोरी होना प्रशासनिक विफलता का संकेत है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

    आगे क्या?

    अब इस मामले की जांच और पुलिस पूछताछ पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के बाद और भी कई अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या जांच का दायरा और बढ़ता है या नहीं।

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