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    शिवसेना में बढ़ा सियासी संकट: 6 बागी सांसदों में से 2 आए सामने, उद्धव ठाकरे के कांग्रेस में विलय की अटकलें

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    मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के भीतर उठे असंतोष ने नया मोड़ ले लिया है। पार्टी के बागी छह सांसदों में से दो सांसद रविवार को खुलकर सामने आए और अपने रुख को सार्वजनिक किया। इस घटनाक्रम के बाद उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना में राजनीतिक संकट और गहरा गया है।

    दो बागी सांसदों ने सार्वजनिक किया अपना रुख

    धराशिव से सांसद ओमराजे निंबालकर ने पुणे में कार्यकर्ताओं की बैठक के दौरान संकेत दिए कि वह उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ जाने का फैसला कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक परिस्थितियों और क्षेत्रीय विकास कार्यों को देखते हुए उन्हें बड़ा निर्णय लेना पड़ा है।

    वहीं हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल आष्टीकर ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी नाराजगी पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे से नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र के विकास और संसाधनों की कमी प्रमुख कारण हैं, जिनकी वजह से यह कदम उठाना पड़ा।

    9 में से 6 सांसदों ने दिखाई बगावत

    उद्धव ठाकरे गुट के कुल 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसदों ने बगावती तेवर अपनाए हैं। बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर स्वयं को अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है।

    सांसदों का दावा है कि पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता शिवसेना का कांग्रेस में विलय करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी अपनी मूल विचारधारा से दूर होती जा रही है, इसलिए संगठन के अस्तित्व को बचाने के लिए अलग राह चुनना आवश्यक हो गया है।

    मेरी छवि खराब करने की कोशिश हो रही थी : निंबालकर

    ओमराजे निंबालकर ने कहा कि चुनाव परिणाम आने के बाद से उनके खिलाफ लगातार नकारात्मक माहौल बनाया जा रहा था। उन्होंने दावा किया कि कई कार्यकर्ताओं ने उन्हें बताया कि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

    उन्होंने कहा कि राजनीतिक और विकास संबंधी कई कार्यों में बाधाएं आ रही थीं, जिसके कारण उन्हें अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं से सलाह लेकर आगे का रास्ता तय करना पड़ा।

    नागेश पाटिल बोले- उद्धव ठाकरे से कोई नाराजगी नहीं

    नागेश पाटिल आष्टीकर ने कहा कि 18 जून तक किसी सांसद ने पार्टी छोड़ने का फैसला नहीं किया था। लेकिन उसके बाद पार्टी के भीतर जिस तरह की बयानबाजी हुई, उससे कई नेताओं को लगा कि अब आगे साथ चलना मुश्किल है।

    उन्होंने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद किसी भी प्रकार की असंवैधानिक या अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

    कांग्रेस में विलय की चर्चाओं ने बढ़ाई हलचल

    महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों यह चर्चा भी तेज है कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना कांग्रेस के साथ विलय का ऐलान कर सकती है। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

    शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) पहले से ही महाविकास अघाड़ी गठबंधन का हिस्सा हैं। इसी बीच उद्धव ठाकरे के हालिया बयान ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी है।

    स्थापना दिवस पर उद्धव और शिंदे के अलग-अलग शक्ति प्रदर्शन

    शिवसेना के 60वें स्थापना दिवस के अवसर पर उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे गुट ने मुंबई में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए। दोनों गुटों ने अपने-अपने समर्थकों के बीच शक्ति प्रदर्शन किया।

    इस दौरान एकनाथ शिंदे ने कहा कि वर्ष 2022 में हुई राजनीतिक टूट को जनता का समर्थन मिला था। उन्होंने दावा किया कि आज उनकी अगुवाई वाली शिवसेना के पास बड़ी संख्या में विधायक, सांसद और स्थानीय निकायों के जनप्रतिनिधि हैं।

    महाराष्ट्र की राजनीति पर नजर

    बागी सांसदों के खुलकर सामने आने के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि बागी सांसदों का यह कदम केवल असंतोष का संकेत है या फिर शिवसेना में एक और बड़े राजनीतिक विभाजन की भूमिका तैयार हो रही है।

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