मां के दस्तावेजों से दूसरे व्यक्ति को दे दिया गैस कनेक्शन
मामला नागदा के बिरलाग्राम निवासी बृजेश विश्वकर्मा की शिकायत से जुड़ा है। बृजेश का आरोप है कि उनकी मां के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन किसी दूसरे व्यक्ति को जारी कर दिया गया था। उन्होंने इस कथित गड़बड़ी की शिकायत कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई में की थी। खाद्य विभाग ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट एडीएम कार्यालय को सौंप दी थी।
आरोप है कि इसके बाद फाइल आगे बढ़ाने और कार्रवाई कराने के नाम पर रोहित गोठवाल ने उनसे रिश्वत मांगी। परेशान होकर बृजेश ने 29 अक्टूबर को लोकायुक्त एसपी विनोद कुमार दीक्षित से शिकायत की। शिकायत का सत्यापन कराने के बाद लोकायुक्त ने आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया।
20 हजार रुपये लेते ही टीम ने पकड़ा
लोकायुक्त महानिदेशक योगेश देशमुख और डीआईजी मनोज कुमार सिंह के मार्गदर्शन में गुरुवार, 5 नवंबर को टीम ने कलेक्ट्रेट परिसर में कार्रवाई की। जैसे ही रोहित गोठवाल ने शिकायतकर्ता से 20 हजार रुपये लिए, टीम ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
एडीएम की भूमिका की जांच की मांग
कर्मचारी की गिरफ्तारी के बाद मामले में एडीएम अतेन्द्र सिंह गुर्जर की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष भरत पोरवाल ने मांग की है कि लोकायुक्त जांच का दायरा केवल लिपिक तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि एडीएम की भूमिका की भी जांच की जाए।
पोरवाल का कहना है कि उज्ज्वला योजना के कथित फर्जीवाड़े और गैस एजेंसी की गड़बड़ी की जांच एडीएम स्तर पर हो रही थी। ऐसे में जांच रिपोर्ट और आगे की कार्रवाई से जुड़े फैसलों की भी पड़ताल होनी चाहिए। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) के तहत आपराधिक साजिश के पहलू की जांच करने की मांग भी की है।
हालांकि, फिलहाल इस मामले में एडीएम अतेन्द्र सिंह गुर्जर की संलिप्तता साबित नहीं हुई है। लोकायुक्त जांच में उनकी भूमिका सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।


