ग्वालियर/गुना। Rajendra Singh Saluja: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के कथित इस्तेमाल से जुड़े आपराधिक मामले में गुना के पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह सलूजा समेत चार आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत में आरोपियों के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज तैयार कराने और धोखाधड़ी के आरोप साबित नहीं हो सके। फैसले से राजेंद्र सलूजा, उनके पिता अमरीक सिंह सलूजा, किरण जैन और हरवीर सिंह को राहत मिली है।
चुनाव जीतने के बाद प्रमाण पत्र पर उठे थे सवाल
राजेंद्र सिंह सलूजा के गुना विधानसभा चुनाव जीतने के बाद उनके जाति प्रमाण पत्र को लेकर शिकायत की गई थी। आरोप था कि सामान्य वर्ग से होने के बावजूद उन्होंने चुनाव में आरक्षित वर्ग से संबंधित प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया। जांच के बाद वर्ष 2011 में उनका जाति प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया गया था।
इसके बाद पत्रकार कोमल प्रसाद शाक्य ने पुलिस से एफआईआर दर्ज करने की मांग की। पुलिस द्वारा मामला दर्ज नहीं किए जाने पर उन्होंने न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष निजी शिकायत दायर की। मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468 और 120-बी के तहत आरोप लगाए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सुनवाई
मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। वर्ष 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को एक साल के भीतर सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाने का निर्देश दिया था। इसके बाद ग्वालियर हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई आगे बढ़ी।
इससे पहले राजेंद्र सलूजा ने जाति प्रमाण पत्र निरस्त किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। वर्ष 2012 में उनकी याचिका और 2013 में पुनर्विचार याचिका खारिज हो गई थी।
अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में नाकाम
सुनवाई पूरी होने के बाद हाईकोर्ट ने चारों आरोपियों को आपराधिक मामले में बरी कर दिया। अदालत में उनके खिलाफ लगाए गए आरोप साबित नहीं हो सके। फैसले के बाद राजेंद्र सिंह सलूजा ने न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए मुश्किल समय में साथ देने के लिए गुना की जनता का आभार जताया।


